सरकारी दवाओं को री-लेबल कर खुले बाजार में बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश, चार गिरफ्तार, करीब ₹6 करोड़ की दवाएं और मशीनें बरामद

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (ईस्टर्न रेंज-I) ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए जीवन रक्षक दवाओं के निर्माण और वितरण में शामिल एक बड़े अंतरराज्यीय रैकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में गिरोह के सरगना समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है और मुखर्जी नगर इलाके में चल रही एक अवैध मैन्युफैक्चरिंग और री-पैकेजिंग यूनिट को सील किया है। यह गिरोह उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से सरकारी अस्पतालों की दवाओं की चोरी कर उन्हें दिल्ली में री-लेबल करता था और फिर दिल्ली-एनसीआर सहित पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में महंगे दामों पर बेच देता था। पुलिस ने इनके कब्जे से लगभग ₹6 करोड़ मूल्य की नकली और सरकारी सप्लाई वाली दवाएं बरामद की हैं।

क्राइम ब्रांच के डीसीपी पंकज कुमार ने बताया कि इंस्पेक्टर लीछमन के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई थी, जिसे दिल्ली में नकली दवाओं के नेटवर्क पर नजर रखने के निर्देश दिए गए थे। टीम को सूचना मिली कि एक संगठित गिरोह सरकारी अस्पतालों के लिए आरक्षित दवाओं के लेबल बदलकर उन्हें व्यावसायिक रूप से बेच रहा है। इस सूचना पर ड्रग्स कंट्रोल विभाग (दिल्ली सरकार) और सीडीएससीओ के साथ मिलकर 22 अप्रैल को मुखर्जी नगर के इंद्रा विकास कॉलोनी स्थित एक मकान पर छापेमारी की गई। वहां से मनोज कुमार जैन (56 वर्ष) को रंगे हाथों पकड़ा गया, जो दवाओं की री-लेबलिंग और नकली दवाएं बनाने का काम कर रहा था।

जांच के दौरान पुलिस ने गिरोह के अन्य सदस्यों को भी गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मनोज कुमार जैन (सरगना – दिल्ली), राजू कुमार (हरियाणा), विक्रम सिंह उर्फ सनी (प्रयागराज, यूपी) और वतन (प्रयागराज, यूपी) के रूप में हुई है। पूछताछ में खुलासा हुआ कि विक्रम सिंह और वतन प्रयागराज के विभिन्न सरकारी अस्पतालों (जैसे करछना अस्पताल, सैदाबाद सीएचसी) से कर्मचारियों के माध्यम से बची हुई या अनयूज्ड सरकारी दवाएं खरीदते थे और उन्हें दिल्ली में मनोज जैन को भेजते थे। मनोज और राजू कुमार इन दवाओं के सरकारी मार्क मिटाकर उन पर नामी ब्रांड्स के लेबल लगा देते थे।

बरामद दवाओं की सूची में अत्यंत महत्वपूर्ण और जीवन रक्षक दवाएं शामिल हैं। पुलिस ने भारी मात्रा में रेबीज वैक्सीन, मानव एल्ब्यूमिन, इंसुलिन, स्नेक वेनम एंटी-सीरम, हेपेटाइटिस-बी वैक्सीन और कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं बरामद की हैं। इसके अलावा दवाओं की पैकेजिंग और लेबलिंग में इस्तेमाल होने वाली 4 मशीनें और भारी मात्रा में कच्चा माल भी जब्त किया गया है।

सरगना मनोज कुमार जैन पहले मणिपुर में निर्माण कार्य करता था, लेकिन नुकसान होने के बाद उसने राजू कुमार के साथ मिलकर यह अवैध धंधा शुरू किया। राजू कुमार ने पंजाब के डेराबस्सी में भी नकली एल्ब्यूमिन बनाने की यूनिट स्थापित की थी। विक्रम सिंह प्रयागराज में एक लैब टेक्नीशियन है और वतन सर्जिकल सामान का व्यापारी है। ये दोनों सरकारी अस्पतालों के अपने संपर्कों के जरिए दवाओं की चोरी करवाते थे। जांच में यह भी सामने आया है कि इस अवैध व्यापार के लिए पैसों के लेनदेन में ‘हवाला’ चैनलों का उपयोग किया गया था।

क्राइम ब्रांच ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब उन सरकारी कर्मचारियों और बाहरी विक्रेताओं की पहचान करने में जुटी है जो इस सिंडिकेट का हिस्सा थे। इस गिरोह के पकड़े जाने से सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बना एक बड़ा खतरा टल गया है। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच और आगे की गिरफ्तारियों की संभावना जारी है।

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