वायुसेना अधिकारी बनकर व्यापारी से ठगे ₹5 लाख से अधिक, क्राइम ब्रांच ने चार मेवाती साइबर ठगों को पकड़ा

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (ISC) ने एक संगठित साइबर धोखाधड़ी सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए चार शातिर जालसाजों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह खुद को भारतीय सेना और वायुसेना का वरिष्ठ अधिकारी बताकर व्यापारियों को सरकारी सप्लाई का झांसा देता था और उनसे लाखों की ठगी करता था। ताजा मामले में, आरोपियों ने एक व्यापारी को एल्युमिनस लैटेराइट (इंडस्ट्रियल ग्रेड) की सप्लाई का फर्जी ऑर्डर देकर ₹5,06,415/- की चपत लगाई। पुलिस ने इस मामले में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर और हरियाणा के मेवात (नुह) से जुड़े पूरे नेटवर्क को बेनकाब किया है।

क्राइम ब्रांच को मिली शिकायत के अनुसार, अज्ञात व्यक्तियों ने खुद को वायुसेना का अधिकारी बताते हुए शिकायतकर्ता को विश्वास में लिया। उन्होंने एयरफोर्स के नाम पर एक फर्जी ‘परचेज ऑर्डर’ भेजा और एल्युमिनस लैटेराइट की सप्लाई करने को कहा। जब शिकायतकर्ता ने माल भेज दिया, तो जालसाजों ने वेंडर रजिस्ट्रेशन और अकाउंट मैपिंग जैसी औपचारिकताओं के नाम पर उससे पैसे जमा करने को कहा। झांसे में आकर शिकायतकर्ता ने ₹5 लाख से अधिक की राशि गंवा दी। संदेह होने पर जब उसने पड़ताल की तो पता चला कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुका है। इस संबंध में क्राइम ब्रांच थाने में धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज किया गया।

एसीपी रमेश लांबा के पर्यवेक्षण और इंस्पेक्टर कमल कुमार यादव के नेतृत्व में एसआई आशीष शर्मा, गुलाब सिंह और कांस्टेबल नवीन यादव सहित एक विशेष टीम का गठन किया गया। तकनीकी विश्लेषण से पता चला कि ठगी में इस्तेमाल किए गए सिम कार्ड बुलंदशहर से जारी हुए थे, लेकिन उनका लोकेशन मेवात के रिमोट इलाकों में मिल रहा था। पुलिस टीम ने डिजिटल फुटप्रिंट्स का पीछा करते हुए सबसे पहले सिम कार्ड उपलब्ध कराने वाले मनीष और कौशल को उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया। उनकी निशानदेही पर गिरोह के मुख्य सदस्यों, बुरहान उर्फ आमिर और रिजवान अहमद को मेवात से दबोचा गया।

पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि ये लोग मेवात के स्थानीय युवाओं को फर्जी सिम और बैंक खाते ऊंचे दामों पर सप्लाई करते थे। एक सिम कार्ड ₹1,500 में और एक बैंक खाता ₹6,000 में बेचा जाता था। गिरफ्तार आरोपियों में मनीष (22 वर्ष), कौशल (22 वर्ष), आमिर उर्फ बुरहान (24 वर्ष) और रिजवान अहमद (30 वर्ष) शामिल हैं। रिजवान अहमद पूर्व में हरियाणा के पलवल में हत्या के प्रयास के मामले में भी शामिल रहा है।

यह गिरोह व्यापारियों की पहचान कर उन्हें सेना या वायुसेना के नाम पर फर्जी सरकारी दस्तावेज भेजता था ताकि विश्वसनीयता बनी रहे। माल की डिलीवरी के समय या उसके बाद, वे पीड़ितों को ‘प्रोसीजरल फॉर्मेलिटी’ के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करते थे। पीड़ित एक बार पैसे जमा कर देता, तो ये लोग अलग-अलग बहानों से और पैसों की मांग करते रहते थे। पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है और फरार अन्य आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए गए हैं। क्राइम ब्रांच अब इस गिरोह द्वारा इस्तेमाल किए गए बैंक खातों और अन्य संदिग्ध सिम कार्डों की जांच कर रही है ताकि इस सिंडिकेट को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सके। मामले की विस्तृत जांच जारी है।

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