NEET परीक्षार्थियों से ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, क्राइम ब्रांच ने मास्टरमाइंड और डॉक्टर समेत 4 को दबोचा

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (सेंट्रल रेंज) ने नीट (NEET-UG) 2026 की परीक्षा से ठीक पहले एक बहुत बड़े संगठित धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों और उनके परिजनों को एमबीबीएस में दाखिला दिलाने का झूठा आश्वासन देकर लाखों रुपये की ठगी कर रहा था। इस ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने 18 छात्रों को सुरक्षित बचाया है, जिनमें से कुछ नाबालिग भी थे। मामले में मास्टरमाइंड संतोष कुमार जायसवाल और एक डॉक्टर सहित कुल चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

डीसीपी क्राइम संजीव कुमार यादव ने बताया कि 2 मई को गुजरात के सूरत पुलिस कमिश्नर से एक संदिग्ध मोबाइल नंबर की सूचना मिली थी, जो दिल्ली में रहकर नीट परीक्षा में सेटिंग कराने का दावा कर रहा था। सूरत पुलिस के साथ समन्वय और तकनीकी निगरानी के आधार पर महिपालपुर एक्सटेंशन के करीब सौ होटलों की तलाशी ली गई। अंततः एक होटल से विनोद भाई पटेल को पकड़ा गया, जिसने गुजरात के तीन परिवारों को झांसे में लेकर उनके बच्चों के ओरिजिनल डॉक्यूमेंट्स और खाली चेक ले लिए थे।

पूछताछ में पता चला कि आरोपियों ने छात्रों को ‘महत्वपूर्ण प्रश्न पत्र’ देने के बहाने उनके माता-पिता से दूर किसी गुप्त स्थान पर बंधक बनाकर रखा है। पुलिस ने गाजियाबाद के मनीपाल अस्पताल के पास जाल बिछाकर पहले संतोष कुमार जायसवाल को दबोचा और तीन छात्रों को बरामद किया। उनकी निशानदेही पर गाजियाबाद के ही एक फ्लैट में छापेमारी कर 15 अन्य छात्रों को सुरक्षित निकाला गया। ये सभी छात्र 3 मई को नीट की परीक्षा में बैठने वाले थे। छात्रों की काउंसलिंग कर उन्हें परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी गई। मौके से संत प्रताप सिंह और डॉ. अखलाक आलम उर्फ गोल्डन आलम को भी गिरफ्तार किया गया।

पूछताछ के दौरान खुलासा हुआ कि 50 वर्षीय मास्टरमाइंड संतोष कुमार जायसवाल, जो बिहार में पैथोलॉजी लैब चलाता है, ने इस पूरी योजना को तैयार किया था। डॉ. अखलाक आलम, जिसने किर्गिस्तान से एमबीबीएस किया है, उसने पुराने वर्षों के प्रश्न पत्रों और कोचिंग संस्थानों के क्वेश्चन बैंक को मिलाकर नकली प्रश्न पत्र तैयार किए थे ताकि छात्रों को विश्वास दिलाया जा सके कि उनके पास ‘लीक’ पेपर है। 59 वर्षीय संत प्रताप सिंह, जो पेशे से बिल्डर है, ने छात्रों को रखने के लिए अपना फ्लैट और लॉजिस्टिक्स मुहैया कराए थे। वहीं, विनोद भाई पटेल गुजरात में एजेंट के रूप में काम कर परिवारों को इस जाल में फंसाता था। ये लोग प्रत्येक छात्र से 20 से 30 लाख रुपये की मांग करते थे।

पुलिस ने आरोपियों के पास से 149 पन्नों के फर्जी प्रश्न-उत्तर दस्तावेज, पीड़ितों के हस्ताक्षरित खाली चेक और कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए हैं। क्राइम ब्रांच ने इस संबंध में बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब इस सिंडिकेट के अन्य बिचौलियों और कड़ियों की तलाश कर रही है। दिल्ली पुलिस ने एडवाइजरी जारी करते हुए अभिभावकों और छात्रों को आगाह किया है कि वे अवैध माध्यमों से दाखिला दिलाने वाले ऐसे जालसाजों से सावधान रहें, क्योंकि यह न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाता है बल्कि छात्रों के भविष्य के लिए भी जोखिम भरा है।

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