31 साल बाद कानून के शिकंजे में ‘फर्जी मौत’ का नाटक रचने वाला कातिल: सोशल मीडिया का ‘सेलिब्रिटी’ निकला मासूम का हत्यारा

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की एआरएससी टीम ने एक ऐसे शातिर अपराधी को गिरफ्तार किया है, जिसने कानून की आँखों में धूल झोंकने के लिए अपनी मौत का नाटक रचा और पिछले 26 वर्षों से फरार चल रहा था। गिरफ्तार आरोपी की पहचान सलीम खान उर्फ सलीम अहमद उर्फ सलीम वास्तिक के रूप में हुई है, जो सोशल मीडिया और यूट्यूब पर खुद को एक सक्रिय ‘सोशल एक्टिविस्ट’ के रूप में पेश कर रहा था। यह वही व्यक्ति है, जिसे 1995 में दिल्ली के गोकुलपुरी इलाके में एक 13 साल के बच्चे के अपहरण और हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

अपहरण और हत्या की खौफनाक दास्तान

घटना 20 जनवरी 1995 की है, जब रामजस स्कूल, दरियागंज का छात्र संदीप बंसल स्कूल से घर नहीं लौटा। अगले दिन फिरौती के लिए फोन आया और 30,000 रुपये की मांग की गई। जांच के दौरान, तत्कालीन पुलिस टीम ने संदीप के स्कूल में मार्शल आर्ट्स सिखाने वाले प्रशिक्षक सलीम खान पर शक जताया। कड़ी पूछताछ में सलीम ने अपना गुनाह कबूल कर लिया और उसकी निशानदेही पर मुस्तफाबाद के एक नाले से बच्चे का शव बरामद किया गया। इस जघन्य वारदात में उसके साथी अनिल ने भी अहम भूमिका निभाई थी। 1997 में कोर्ट ने दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

फर्जी मौत और पहचान का मुखौटा

सलीम खान ने वर्ष 2000 में दिल्ली उच्च न्यायालय से मिली अंतरिम जमानत का गलत फायदा उठाया और फरार हो गया। पुलिस रिकॉर्ड में उसे भगोड़ा घोषित किया गया था, लेकिन उसने कानून से बचने के लिए खुद को ‘मृत’ साबित करने की चाल चली। इस दौरान वह हरियाणा के विभिन्न इलाकों में अलमारी बनाने का काम करता रहा और अंततः 2010 में उत्तर प्रदेश के लोनी, गाजियाबाद में ‘सलीम वास्तिक’ के नाम से नई पहचान बनाकर बस गया। वहाँ उसने कपड़ों का व्यवसाय शुरू किया और बाद में सोशल मीडिया पर सक्रिय होकर खुद को एक समाज सुधारक के रूप में स्थापित करने की कोशिश की।

यूट्यूब और सोशल मीडिया ने खोली पोल

एआरएससी की टीम लंबे समय से पैरोल जंपर्स और भगोड़ों पर नजर रख रही थी। इसी दौरान हेड कांस्टेबल मिंटू यादव को सूचना मिली कि एक यूट्यूबर, जो खुद को सलीम वास्तिक बताता है, वास्तव में 31 साल पुराने हत्याकांड का दोषी है। पुलिस ने पुरानी फाइलों, फिंगरप्रिंट्स और तस्वीरों का मिलान किया, जिससे उसकी असली पहचान उजागर हो गई।

हालिया हमले और सुरक्षा का विवाद

गौरतलब है कि हाल ही में 27 फरवरी 2026 को लोनी में सलीम पर कुछ लोगों ने हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया था। इस हमले के बाद उसे यूपी पुलिस से सुरक्षा भी मिली हुई थी। हालांकि, दिल्ली पुलिस की मुस्तैद टीम ने इस सुरक्षा घेरे को दरकिनार करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल उसे तिहाड़ जेल भेज दिया गया है। डीसीपी क्राइम संजीव कुमार यादव के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई ने साबित कर दिया है कि अपराधी कितना भी शातिर बने अंततः पकड़ा ही जाता है।

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