कॉर्पोरेट जगत में नारी उत्पीड़न व धर्मांतरण का षड्यंत्र: विहिप ने प्रमुख उद्योग संगठनों को दी चेतावनी

नई दिल्ली: विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने कॉर्पोरेट जगत में महिलाओं की सुरक्षा और धर्मांतरण जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। विहिप के महासचिव बजरंग बागड़ा ने फिक्की, सीआईआई, एसोचैम, नैसकॉम और पीएचडीसीआईआई जैसे प्रमुख व्यावसायिक संगठनों को पत्र लिखकर कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने नासिक स्थित टीसीएस में सामने आए हालिया प्रकरण का हवाला देते हुए कॉर्पोरेट जगत को सतर्क रहने और सुधारात्मक कदम उठाने की चेतावनी दी है।

विहिप महासचिव ने कहा कि टीसीएस नासिक मामले में सामने आए तथ्य बेहद चिंताजनक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां एक विशेष समुदाय से जुड़े कुछ पुरुष कर्मचारी सुनियोजित तरीके से महिला सहकर्मियों को निशाना बना रहे थे। यह मामला केवल उत्पीड़न का नहीं, बल्कि इसमें जबरन मांस खिलाने, ब्लैकमेल करने, बलात्कार और अंततः धर्मांतरण जैसे गंभीर कृत्य शामिल हैं। बागड़ा ने दावा किया कि इन कृत्यों के पीछे कट्टरपंथियों और आतंकवादियों से सांठगांठ तथा विदेशी फंडिंग की आशंका है।

पत्र में टीसीएस के कार्मिक प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। विहिप का आरोप है कि कंपनी के एचआर विभाग ने इन अपराधों में शामिल गिरोहों को प्रश्रय दिया और जानबूझकर ऐसी नियुक्तियां कीं, जिससे महिला कर्मचारियों का शोषण किया जा सके। संगठन का कहना है कि पीड़ित महिलाओं की शिकायतों को प्रबंधन द्वारा नजरअंदाज करना उनकी घोर लापरवाही और इस अपराध में मौन भागीदारी को दर्शाता है। यह कार्यस्थलों पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम से संबंधित कानूनों का भी खुला उल्लंघन है।

बजरंग बागड़ा ने स्पष्ट किया कि विहिप यह नहीं मानती कि किसी विशेष समुदाय के सभी लोग अपराध में लिप्त हैं, लेकिन टीसीएस मामले में सामने आया पैटर्न अतिरिक्त सतर्कता की मांग करता है। उन्होंने उद्योग जगत के शीर्ष निकायों से अपील की है कि वे अपनी सदस्य कंपनियों को कार्मिक विभाग में भर्तियों के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दें। विहिप ने कॉर्पोरेट जगत से अपनी भर्ती नीतियों की गंभीर समीक्षा करने और महिलाओं के लिए सुरक्षित कार्य-वातावरण सुनिश्चित करने की मांग की है।

विहिप ने चेतावनी दी है कि यदि कॉर्पोरेट जगत ने सुरक्षा और नीतियों के क्रियान्वयन में सुधारात्मक कदम नहीं उठाए, तो संगठन संवैधानिक उपायों को अपनाने के लिए विवश होगा। विहिप ने यह भी कहा कि वह पूरे मामले पर पैनी नजर रखेगी। उन्होंने कहा कि कॉर्पोरेट जगत को आर्थिक लाभ के साथ-साथ राष्ट्र के सामाजिक सौहार्द्र का भी ध्यान रखना चाहिए। समाज का विश्वास बनाए रखने के लिए ऐसी गंभीर असावधानियों और चूकों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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