गार्गी महाविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में धांधली का आरोप: अभाविप ने वामपंथी शिक्षकों व प्रशासन पर साधा निशाना

नई दिल्ली: गार्गी महाविद्यालय में हाल ही में संपन्न हुए छात्रसंघ चुनाव एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गए हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने चुनाव प्रक्रिया में बड़ी धांधली और महाविद्यालय प्रशासन की मिलीभगत का गंभीर आरोप लगाया है। अभाविप का दावा है कि प्रशासन में बैठे वामपंथी विचारधारा के शिक्षकों द्वारा सुनियोजित तरीके से आइसा और एसएफआई के प्रत्याशियों को लाभ पहुँचाने के लिए चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित किया गया।

विवाद की शुरुआत 17 अप्रैल को हुई, जब एक प्रत्याशी छात्रा ने डूसू अध्यक्ष आर्यन मान और अभाविप कार्यकर्ताओं से संपर्क कर चुनाव प्रक्रिया में पक्षपात की शिकायत की। छात्रा ने आरोप लगाया कि मतदान के दौरान कॉलेज के नॉन-टीचिंग स्टाफ द्वारा उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। छात्रा की शिकायत पर डूसू अध्यक्ष आर्यन मान और अभाविप के कार्यकर्ता महाविद्यालय परिसर पहुँचे और निष्पक्ष चुनाव की मांग को लेकर शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया।

अभाविप ने आरोप लगाया है कि जब उनके कार्यकर्ता शांतिपूर्ण ढंग से अपना विरोध जता रहे थे, तब महाविद्यालय के नॉन-टीचिंग स्टाफ ने न केवल उनके खिलाफ भद्दी भाषा का इस्तेमाल किया, बल्कि जातिसूचक टिप्पणियां भी कीं। संगठन का कहना है कि उनके पास इस घटना के वीडियो प्रमाण उपलब्ध हैं, जो पूरी घटना की पुष्टि करते हैं।

डूसू अध्यक्ष आर्यन मान ने महाविद्यालय की प्राचार्या से वार्ता कर स्पष्ट किया कि परिषद का उद्देश्य सुरक्षा व्यवस्था भंग करना नहीं, बल्कि छात्रसंघ चुनावों में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना था। उन्होंने कहा कि अभाविप हमेशा छात्राओं के सम्मान और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए तत्पर है।

अभाविप दिल्ली प्रदेश मंत्री सार्थक शर्मा ने इस पूरे प्रकरण को वामपंथी शिक्षकों व ‘लेफ्टिस्ट तंत्र’ की राजनीतिक विद्वेष से प्रेरित साजिश करार दिया। उन्होंने कहा, “कुछ लोग तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर छात्राओं को भड़काने का प्रयास कर रहे हैं। अभाविप किसी भी प्रकार के दुष्प्रचार, झूठ और नफरत की राजनीति का जवाब तथ्य और सत्य के आधार पर देने के लिए प्रतिबद्ध है।”

संगठन ने चेतावनी दी है कि वे छात्राओं की सुरक्षा और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे। इस पूरे विवाद के बाद महाविद्यालय में छात्र राजनीति गरमा गई है और निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।

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