डीयू के 30 से अधिक कॉलेजों में अभाविप का हल्लाबोल, जर्जर ढांचे और हॉस्टल की कमी पर फूटा छात्रों का गुस्सा

नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के कॉलेजों में व्याप्त अव्यवस्थाओं और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के खिलाफ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने शुक्रवार को आर-पार की जंग छेड़ दी। परिषद के नेतृत्व में डीयू के 30 से अधिक कॉलेजों में एक साथ व्यापक आंदोलन किया गया, जिसमें 4000 से अधिक छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लेकर प्रशासनिक अक्षमता के विरुद्ध अपनी आवाज बुलंद की। छात्रों का मुख्य आक्रोश कॉलेजों के जर्जर बुनियादी ढांचे, हॉस्टल की भारी कमी और पीने के पानी व स्वच्छता जैसी मूलभूत सुविधाओं की अनदेखी को लेकर था। परिषद ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सुधार नहीं हुआ तो आगामी दिनों में उग्र आंदोलन किया जाएगा।

आंदोलन के दौरान अभाविप कार्यकर्ताओं ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी महाविद्यालय, रामजस महाविद्यालय और किरोड़ीमल जैसे प्रमुख कॉलेजों सहित अन्य परिसरों में प्रखर तरीके से अपनी मांगें रखीं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने कॉलेज प्राचार्यों के माध्यम से प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर शैक्षणिक वातावरण को सुधारने की मांग की। छात्रों का कहना है कि वे भारी-भरकम फीस चुकाने के बावजूद मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं, जबकि कॉलेज प्रशासन वर्षों से इन समस्याओं पर आंखें मूंदे बैठा है। कई कॉलेजों की इमारतों की हालत बेहद खराब है, जिससे छात्रों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है।

अभाविप दिल्ली के प्रदेश मंत्री सार्थक शर्मा ने आंदोलन को संबोधित करते हुए कहा कि आज का प्रदर्शन डीयू प्रशासन की उदासीनता का परिणाम है। 4000 से अधिक विद्यार्थियों का सड़कों पर उतरना यह सिद्ध करता है कि विश्वविद्यालय अब छात्रों की जरूरतों के प्रति गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि अभाविप प्रत्येक छात्र को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है और यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक अंतिम छात्र की समस्या का समाधान नहीं हो जाता। परिषद ने कॉलेज प्रशासन से अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाने और छात्रों के शैक्षणिक भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद करने का आग्रह किया है। इस विरोध प्रदर्शन के चलते शुक्रवार को कैंपस का माहौल पूरी तरह छात्र राजनीति के रंग में रंगा नजर आया।

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