ऑनलाइन लॉटरी के नाम पर धोखाधड़ी करने वाला सिंडिकेट ध्वस्त, तीन गिरफ्तार, लैपटॉप और पासबुक बरामद

नई दिल्ली: दिल्ली के उत्तरी जिला की साइबर थाना पुलिस ने ऑनलाइन लॉटरी के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले एक शातिर गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में मास्टरमाइंड समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो भोले-भाले लोगों को 11 करोड़ रुपये की लॉटरी जीतने का झांसा देकर उनसे टैक्स और एनओसी के नाम पर पैसे ऐंठते थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान दीपांशु (27 वर्ष), चंदू शर्मा (27 वर्ष) और सीता (42 वर्ष) के रूप में हुई है। पुलिस जांच में सामने आया है कि इस गिरोह द्वारा खोले गए बैंक खातों से संबंधित 10 अन्य शिकायतें भी एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज हैं।

उत्तरी जिले के डीसीपी राजा बांठिया ने बताया कि रेलवे में सीनियर क्लर्क के पद पर कार्यरत भीम चंद ने 60 हजार रुपये की ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित ने फेसबुक पर 11 करोड़ रुपये की लॉटरी का विज्ञापन देखा था और 500 रुपये का टिकट खरीदा था। बाद में उन्हें बताया गया कि उन्होंने 10 लाख रुपये जीते हैं और इसे क्लेम करने के लिए इनकम टैक्स व अन्य शुल्क के नाम पर उनसे 60 हजार रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए। इस संबंध में उत्तरी जिला साइबर थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।

एसीपी ऑपरेशंस विदुषी कौशिक के मार्गदर्शन और साइबर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर रोहित गहलोत के नेतृत्व में एसआई अरविंद यादव, हेड कांस्टेबल हिमांशु, भरत और कांस्टेबल विजय की टीम ने तकनीकी जांच शुरू की। टीम ने लगभग 200 मोबाइल नंबरों के सीडीआर, आईपी लॉग्स और गूगल डेटा का विश्लेषण किया। जांच में पता चला कि ठगी की रकम जिस एक्सिस बैंक खाते में गई थी, वह चंदू शर्मा के नाम पर था, लेकिन उसका पता और फोन नंबर फर्जी निकले। तकनीकी सुरागों का पीछा करते हुए पुलिस ने भलस्वा डेयरी इलाके में छापेमारी की और सबसे पहले दीपांशु को गिरफ्तार किया। दीपांशु से मिली जानकारी के आधार पर चंदू शर्मा और दीपांशु की चाची सीता को भी गिरफ्तार कर लिया गया।

पूछताछ के दौरान आरोपी दीपांशु ने अपनी मोडस ऑपरेंडी का खुलासा किया। वह डिजिटल मार्केटिंग का कोर्स कर चुका है और खुद को बैंक कर्मचारी बताकर मजदूरों, कम आय वाले लोगों और शराब की दुकानों पर आने वाले ग्राहकों को 5 हजार रुपये का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था। वह इन खातों की किट और सिम कार्ड अपने पास रख लेता था और बाद में इन्हें अन्य ठगों को 20 हजार रुपये में बेच देता था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से तीन मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, चेक बुक और पासबुक बरामद की है। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों और इनके द्वारा किए गए अन्य फर्जीवाड़ों की जांच कर रही है।

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