अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट का भंडाफोड़: चीनी टेलीग्राम चैनल से जुड़े तार, बैंक मैनेजर समेत तीन गिरफ्तार

नई दिल्ली: दिल्ली के पूर्वी जिला पुलिस ने ‘ऑपरेशन साइबर हॉक’ के तहत एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह के तार चीनी टेलीग्राम चैनलों और विदेशी हैंडलर्स से जुड़े हुए हैं। पुलिस ने इस मामले में बैंक कर्मचारी समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो भोले-भाले लोगों के नाम पर ‘म्यूल बैंक अकाउंट’ (फर्जी खाते) खोलकर ठगी की रकम को विदेश भेजने में मदद करते थे। गिरफ्तार आरोपियों में सिटी यूनियन बैंक, मयूर विहार का रिलेशनशिप मैनेजर फ्रांशु कुमार (23 वर्ष) भी शामिल है।

पूर्वी जिले के डीसीपी राजीव कुमार ने बताया कि यह मामला बरेली निवासी अमन बाबू मौर्य की शिकायत के बाद सामने आया, जिनसे ₹10,000 की ठगी की गई थी। जांच के दौरान मयूर विहार फेस-1 स्थित सिटी यूनियन बैंक के एक संदिग्ध खाते ‘कंस्ट्रक्शन रॉयल एंटरप्राइज’ का पता चला। वित्तीय जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि यह अकेला खाता आठ अलग-अलग साइबर शिकायतों से जुड़ा हुआ था। इस आधार पर पांडव नगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई।

विशेष स्टाफ के इंस्पेक्टर जितेंद्र मलिक के नेतृत्व में गठित टीम ने तकनीकी विश्लेषण के बाद सबसे पहले शौकीन और उसके भतीजे शारुख उर्फ जोजो को गिरफ्तार किया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर फ्रांशु कुमार ने पैसों के लालच में नियमों को ताक पर रखकर ये खाते खोलने में मदद की थी। पुलिस ने बैंक मैनेजर को भी डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर गिरफ्तार कर लिया है।

आरोपी शारुख के मोबाइल की फॉरेंसिक जांच में चीनी टेलीग्राम चैनलों के साथ बातचीत के प्रमाण मिले हैं। आरोपी इन खातों की जानकारी विदेशी हैंडलर्स को भेजते थे। बदले में उन्हें क्रिप्टोकरेंसी में कमीशन मिलता था। गिरोह एक विशेष एपीके आधारित ‘एसएमएस फॉरवर्डर टूल’ का इस्तेमाल करता था, जिससे विदेशी हैंडलर्स भारत में मौजूद बैंक खातों के ओटीपी को दूर बैठे ही एक्सेस कर लेते थे। इससे उन्हें खातों पर पूरा नियंत्रण मिल जाता था और वे तुरंत ठगी की रकम को डाइवर्ट कर देते थे।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में शौकीन और शारुख पेशे से नाई हैं, जबकि फ्रांशु बैंक में ऊंचे पद पर तैनात था। पुलिस अब इस सिंडिकेट के अन्य सदस्यों और मास्टरमाइंड की तलाश कर रही है जो विदेशों से इस नेटवर्क को संचालित कर रहे हैं। पुलिस की इस कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधियों और स्थानीय मददगारों के बीच के गठजोड़ को पूरी तरह से बेनकाब कर दिया है।

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