कैश के बदले यूएसडीटी ट्रांसफर कराकर लगाया चूना; नेब सराय पुलिस ने दबोचे तीन जालसाज

नई दिल्ली: दिल्ली के दक्षिण जिला अंतर्गत नेब सराय थाना पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे क्रिप्टो करेंसी धोखाधड़ी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह भोले-भले लोगों को कैश के बदले यूएसडीटी बेचने का झांसा देकर डिजिटल एसेट्स हड़प लेता था। पुलिस ने इस मामले में मोहम्मद अजीम अंसारी, कौसैन परवेज और तनिष जोशी उर्फ सुभान को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि इस सिंडिकेट के तार दुबई से जुड़े हुए हैं।

दक्षिण जिले के डीसीपी अनंत मित्तल ने बताया कि संगम विहार निवासी अब्दुल रहमान ने शिकायत दर्ज कराई थी कि मोहम्मद अजीम अंसारी ने उन्हें 6.10 लाख रुपये नकद देने का वादा कर ट्रस्ट वॉलेट के जरिए 6099 यूएसडीटी ट्रांसफर करवा लिए। ट्रांसफर पूरा होते ही आरोपी ने पैसे देने से इनकार कर दिया और पीड़ित को झूठे दावों से गुमराह करने लगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए नेब सराय एसएचओ इंस्पेक्टर पारस नाथ वर्मा के नेतृत्व में एसआई विवेक, रोहिताश और हेड कांस्टेबल हरज्ञान सहित एक विशेष टीम गठित की गई।

तकनीकी जांच और वॉलेट ट्रैकिंग के दौरान पुलिस ने पाया कि पीड़ित द्वारा ट्रांसफर किए गए यूएसडीटी कुछ ही सेकंड के भीतर अन्य वॉलेट्स में भेज दिए गए, जो एक पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा था। डिजिटल फॉरेंसिक और सर्विलांस की मदद से पुलिस ने तीन आरोपियों को लोकेट कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि ठगी गई क्रिप्टो करेंसी को दुबई स्थित एक हैंडलर द्वारा संचालित वॉलेट्स में भेजा गया था, जिससे इस नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय होने की पुष्टि हुई।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 6 मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनमें ट्रस्ट वॉलेट का एक्सेस, आपत्तिजनक चैट रिकॉर्ड और उन वॉलेट्स का विवरण मिला है जहां ठगी की रकम भेजी गई थी। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में मोहम्मद अजीम अंसारी और तनिष जोशी गाजियाबाद के रहने वाले हैं, जबकि कौसैन परवेज दिल्ली का निवासी है।

डीसीपी ने बताया कि पुलिस अब इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों और दुबई स्थित हैंडलर की भूमिका की गहराई से जांच कर रही है। दक्षिण जिला पुलिस ने आम जनता के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए कहा है कि अनजान लोगों के साथ किसी भी प्रकार की क्रिप्टो डील करने से बचें और डिजिटल संपत्ति ट्रांसफर करने से पहले पूरी तरह सत्यापन कर लें। किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर रिपोर्ट दर्ज कराएं। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है।

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