विदेश में नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, तीन गिरफ्तार , 14 पासपोर्ट और फर्जी वीजा बरामद

नई दिल्ली: दिल्ली के दक्षिण जिला की साइबर थाना पुलिस ने विदेशी धरती पर नौकरी और वीजा दिलाने के नाम पर मासूम लोगों से ठगी करने वाले एक संगठित अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने रानी बाग इलाके में छापेमारी कर गिरोह के तीन सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई एनसीआरपी पोर्टल पर प्राप्त एक शिकायत और उसके बाद किए गए तकनीकी विश्लेषण व डिजिटल निगरानी के आधार पर की गई है। पुलिस ने इनके पास से 14 पासपोर्ट, फर्जी वीजा, लैपटॉप और जाली मुहरें बरामद की हैं।

दक्षिण जिले के डीसीपी अनंत मित्तल ने बताया कि एक पीड़ित ने ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई थी, जिसे व्हाट्सएप के जरिए विदेश में नौकरी और वीजा दिलाने का झांसा देकर बड़ी रकम ऐंठ ली गई थी। भुगतान प्राप्त करने के बाद आरोपियों ने संपर्क तोड़ दिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर हंसराज और इंस्पेक्टर अभिमन्यु के नेतृत्व में हेड कांस्टेबल तरुण, सतवीर और कांस्टेबल विनोद की एक विशेष टीम गठित की गई।

तफ्तीश के दौरान पुलिस टीम ने संदिग्ध मोबाइल नंबरों का तकनीकी विश्लेषण किया, जिससे उनकी लोकेशन रानी बाग, दिल्ली में मिली। 26 मार्च को पुलिस ने बताए गए ठिकाने पर छापा मारा और तीन आरोपियों को धर दबोचा। पकड़े गए आरोपियों की पहचान नंद किशोर प्रसाद (निवासी हुगली, पश्चिम बंगाल), अहमद हयात खान (निवासी औरंगाबाद, बिहार) और मुश्ताक खान (निवासी शाहीन बाग, दिल्ली) के रूप में हुई है।

हैरानी की बात यह है कि पकड़े गए आरोपी उच्च शिक्षित हैं। नंद किशोर दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातक और मास कम्युनिकेशन में डिप्लोमा धारक है, वहीं मुश्ताक खान ने मार्केटिंग और सेल्स में एमबीए किया है। पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह का मास्टरमाइंड शादाब उर्फ मोहम्मद खुशनूद है, जो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए शिकार ढूंढता था।

जांच में सामने आया कि यह सिंडिकेट व्हाट्सएप और सोशल मीडिया के जरिए पीड़ितों से संपर्क करता था। उन्हें विदेशी नौकरियों के आकर्षक ऑफर दिए जाते थे और फिर फर्जी वेबसाइटों पर रीडायरेक्ट किया जाता था। भरोसा जीतने के लिए उन्हें जाली वीजा दस्तावेज दिखाए जाते थे। आरोपियों ने प्रति पीड़ित 15,000 से लेकर 90,000 रुपये तक वसूले।

पुलिस ने मौके से 6 स्मार्टफोन, 2 लैपटॉप, 4 डेस्कटॉप, 14 पासपोर्ट, फर्जी वीजा व दस्तावेजों से भरी पेनड्राइव और 3 फर्जी मुहरें जब्त की हैं। डीसीपी ने बताया कि पुलिस अब इस गिरोह के वित्तीय लेन-देन और देशभर में इनके अन्य पीड़ितों की पहचान कर रही है। मास्टरमाइंड शादाब और अन्य सहयोगियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। दिल्ली पुलिस ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे किसी भी नौकरी के ऑफर के लिए भुगतान करने से पहले उसकी पूरी जांच और सत्यापन जरूर करें।

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