कंबोडिया से संचालित डिजिटल अरेस्ट सिंडिकेट का भंडाफोड़, दिल्ली पुलिस ने दो जालसाजों को दबोचा

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की आईएफएसओ (इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस) यूनिट ने एक संगठित अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध सिंडिकेट का पर्दाफाश करते हुए इसके एक बड़े मॉड्यूल को ध्वस्त कर दिया है। ऑपरेशन साईहॉक 4.0 के तहत की गई इस प्रभावी कार्रवाई में पुलिस ने दिल्ली के मयूर विहार इलाके से दो आरोपियों, वैभव राज और अनिल कुमार को गिरफ्तार किया है। इस छापेमारी के दौरान मौके से एक सक्रिय सिम बॉक्स (32 स्लॉट वाला), 350 से अधिक सिम कार्ड, एयरटेल एक्सस्ट्रीम फाइबर मॉडम, इंटरनेट स्प्लिटर, लैपटॉप और कई मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। यह गिरोह मयूर विहार में अवैध सिम बॉक्स और जीएसएम गेटवे सेटअप चला रहा था, जिसके जरिए कंबोडिया और अन्य दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में बैठे ठग भारतीय नागरिकों को अपना शिकार बनाते थे।

जांच में यह बात सामने आई है कि यह सिंडिकेट तकनीक का सहारा लेकर अंतरराष्ट्रीय वीओआईपी कॉल्स को भारतीय मोबाइल नेटवर्क पर रूट करता था। इससे जब विदेशी ठग भारतीय लोगों को कॉल करते थे, तो उनके मोबाइल पर स्थानीय भारतीय नंबर ही दिखाई देता था, जिससे लोग आसानी से झांसे में आ जाते थे। डीसीपी विनीत कुमार और एसीपी विवेकानंद झा की देखरेख में गठित इंस्पेक्टर सतीश कुमार की टीम ने तकनीकी विश्लेषण और जमीनी खुफिया जानकारी के आधार पर मयूर विहार फेज-3 स्थित जीडी कॉलोनी में छापेमारी कर इस अवैध टेलीफोन एक्सचेंज को पकड़ा। गिरफ्तार आरोपी अनिल कुमार ने यह परिसर किराए पर लिया था और वह पूरी रसद व्यवस्था संभालता था, जबकि वैभव राज इंटरनेट कनेक्शन और रिमोट एक्सेस ऐप के जरिए विदेशी हैंडलर्स को सिस्टम से जोड़ता था।

इस गिरोह का काम करने का तरीका बेहद शातिर था। ये जालसाज खुद को पुलिस, सीबीआई या कस्टम अधिकारी बताकर लोगों को फोन करते थे और उन्हें डराते थे कि उनके नाम पर अवैध पार्सल पकड़ा गया है या उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज है। इसके बाद पीड़ितों को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर घंटों वीडियो कॉल पर बंधक बनाकर रखा जाता था और उनकी संपत्ति की जांच के बहाने पैसे फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर करा लिए जाते थे। ठगी गई रकम को म्यूल बैंक खातों के जरिए अलग-अलग परतों में घुमाया जाता था ताकि पुलिस की पकड़ से बचा जा सके। पुलिस ने मौके से सत्यम तिवारी नामक व्यक्ति के नाम की चेकबुक और कई कूरियर लिफाफे भी बरामद किए हैं, जिससे इस नेटवर्क के विस्तार का पता चलता है।

इस ऑपरेशन की सफलता ने एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय गिरोह की कमर तोड़ दी है जो कंबोडिया से बैठकर भारतीय दूरसंचार बुनियादी ढांचे का दुरुपयोग कर रहा था। पुलिस की जांच अब इस सिंडिकेट के मुख्य हैंडलर ‘ए’ और सिम कार्ड की आपूर्ति करने वाले अन्य साथियों की तलाश पर केंद्रित है। दिल्ली पुलिस ने इस कार्रवाई के साथ ही आम जनता को सचेत किया है कि किसी भी सरकारी एजेंसी द्वारा डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई प्रक्रिया नहीं अपनाई जाती है। यदि किसी के पास इस तरह की कोई संदिग्ध कॉल आती है, तो उसकी सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस थाने को दें। फिलहाल पुलिस इस मामले में मनी ट्रेल और अन्य सहयोगियों की भूमिका की गहनता से जांच कर रही है।

Comments are closed.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More