जनकपुरी पिट केस: मुख्य ठेकेदार कंपनी के निदेशक समेत तीन के खिलाफ चार्जशीट दाखिल, 877 पन्नों में दर्ज है लापरवाही का कच्चा चिट्ठा

नई दिल्ली: पश्चिमी दिल्ली के जनकपुरी इलाके में हुए दर्दनाक हादसे के मामले में दिल्ली पुलिस ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्थानीय अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दी है। पुलिस ने मुख्य ठेकेदार कंपनी के निलंबित निदेशक, एक सब-ठेकेदार और एक मजदूर को इस हादसे के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज इस मामले की जांच के बाद पुलिस ने कुल 877 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट पेश की है। पुलिस ने अदालत को सूचित किया है कि इस मामले में अन्य संदिग्धों की भूमिका की जांच अभी जारी है और उनके खिलाफ जल्द ही सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की जाएगी।

इस मामले में पुलिस ने जिन मुख्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, उनमें मुख्य ठेकेदार कंपनी ‘केकेस्पन प्राइवेट इंडिया लिमिटेड’ के निलंबित निदेशक हिमांशु गुप्ता (45) निवासी गुलमोहर पार्क, सब-ठेकेदार राजेश कुमार (47) निवासी त्रिलोक नगर और राजेश द्वारा तैनात किए गए मजदूर योगेश (23) निवासी एटा, उत्तर प्रदेश शामिल हैं। जांच में सामने आया है कि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी की गई थी, जिसके चलते यह बड़ा हादसा हुआ। पुलिस ने अपनी चार्जशीट में तकनीकी सबूतों, चश्मदीदों के बयानों और निर्माण कार्य में बरती गई कथित लापरवाही को मुख्य आधार बनाया है।

उल्लेखनीय है कि 6 फरवरी को जनकपुरी इलाके में निर्माण कार्य के दौरान एक गहरा गड्ढा होने से हुए हादसे ने पूरी राजधानी को हिला दिया था। इस संबंध में थाना जनकपुरी में एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, चार्जशीट में उन सभी कड़ियों को जोड़ा गया है जिनसे यह सिद्ध होता है कि यदि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होते, तो इस हादसे को टाला जा सकता था। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई से निर्माण कार्यों में लापरवाही बरतने वाली कंपनियों और ठेकेदारों के बीच हड़कंप मच गया है। मामले की अगली सुनवाई जल्द ही अदालत में होगी।

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