कंबोडिया के साइबर कैंप में सीखा था ठगी का हुनर, एपीके फाइल भेजकर खाता खाली करने वाले मास्टरमाइंड गिरफ्तार

नई दिल्ली: दिल्ली के शाहदरा जिला की साइबर थाना पुलिस ने एक अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए इसके मास्टरमाइंड सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए मास्टरमाइंड ने कंबोडिया के साइबर ठगी कैंपों में बाकायदा ट्रेनिंग ली थी और भारत लौटकर करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दे रहा था। पुलिस ने इस मामले में विक्रांत सोनी और राम अवतार सिंह को उत्तर प्रदेश के आगरा से गिरफ्तार किया है। यह गिरोह अब तक लगभग 3.60 करोड़ रुपये की ठगी कर चुका है।

शाहदरा जिले के डीसीपी राजेंद्र प्रसाद मीणा ने बताया कि पीयूष नामक व्यक्ति की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था। पीड़ित के खाते से उसकी जानकारी के बिना 6,65,992 रुपये निकाल लिए गए थे। जांच में सामने आया कि पीड़ित के मोबाइल में एक अनजान एपीके फाइल इंस्टॉल करवाई गई थी, जिसके जरिए ठगों ने उसके फोन का पूरा एक्सेस हासिल कर लिया था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीपी ऑपरेशंस शाहदरा की देखरेख और साइबर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर विजय कुमार के नेतृत्व में एसआई पुष्पेंद्र पांडे और एसआई एस.बी. शरण की एक विशेष टीम गठित की गई। तकनीकी विश्लेषण के दौरान पता चला कि ठगी की रकम ‘आर पी टोल एंड पार्किंग’ के नाम पर खुले एक बैंक खाते में गई है, जिसे आगरा निवासी राम अवतार सिंह संचालित कर रहा था। पुलिस ने पहले आगरा के शास्त्री पुरम में छापेमारी कर राम अवतार को पकड़ा, जिसने पूछताछ में मास्टरमाइंड विक्रांत सोनी का नाम उगला। इसके बाद पुलिस ने जगदीशपुरा, आगरा से विक्रांत सोनी को भी धर दबोचा।

कंबोडिया में ली थी ठगी की ट्रेनिंग

तफ्तीश में विक्रांत सोनी ने चौंकाने वाला खुलासा किया। उसने बताया कि 2023 में वह पिंकी यादव नाम की महिला के जरिए ‘लियो’ नाम के एक चीनी नागरिक के संपर्क में आया था। जुलाई 2024 में उसे बैंकॉक के रास्ते कंबोडिया ले जाया गया, जहां उसे शहर के बाहरी इलाकों में स्थित साइबर फ्रॉड कैंपों में रखा गया। वहां उसे भारतीय पीड़ितों को सोशल इंजीनियरिंग के जरिए फंसाने, एपीके लिंक भेजकर फोन हैक करने और स्क्रिप्ट के आधार पर बात करने की 3-4 महीने की ट्रेनिंग दी गई।

ट्रेनिंग पूरी करने के बाद विक्रांत भारत लौटा और अपना नेटवर्क खड़ा किया। वह टेलीग्राम के जरिए विदेशी हैंडलर्स के संपर्क में रहता था और आर्यन कुमार जैसे साथियों की मदद से ठगी की रकम को म्यूल खातों में मंगाता था। पुलिस ने इनके पास से वारदात में इस्तेमाल मोबाइल फोन, आईपी लॉग्स और टेलीग्राम चैट जैसे महत्वपूर्ण सबूत बरामद किए हैं। डीसीपी ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और न ही कोई संदिग्ध फाइल अपने मोबाइल में इंस्टॉल करें। फिलहाल पुलिस इस सिंडिकेट के अन्य सदस्यों और विदेशी हैंडलर्स की तलाश कर रही है।

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