शाहदरा साइबर पुलिस ने निवेश के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का किया भंडाफोड़; फर्जी कंपनियां बनाकर लगाया था लाखों का चूना, दो गिरफ्तार

नई दिल्ली: दिल्ली के शाहदरा जिला की साइबर थाना पुलिस ने शेयर बाजार में ऊंचे मुनाफे का लालच देकर करोड़ों की ठगी करने वाले एक संगठित साइबर सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों शशिकांत शर्मा और दीपक को पालम विलेज इलाके से गिरफ्तार किया है। ये आरोपी ‘शैल कंपनियां’ बनाकर ठगी की रकम को इधर-उधर करने का काम करते थे। इनके गिरोह से अब तक देशभर की 29 साइबर शिकायतें जुड़ी पाई गई हैं।

शाहदरा जिले के डीसीपी राजेंद्र प्रसाद मीणा ने बताया कि मुनीश चंद्र नामक व्यक्ति ने 6.83 लाख रुपये की ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित को ‘न्यू बेरी कैपिटल प्राइवेट लिमिटेड’ नामक फर्म के व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया था। ठगों ने सेबी का फर्जी रजिस्ट्रेशन नंबर दिखाकर खुद को असली ब्रोकर बताया और शुरुआत में फ्री स्टॉक टिप्स देकर भरोसा जीता। इसके बाद पीड़ित को ‘आये फाइनेंस’ और ‘मरुशिका टेक्नोलॉजी’ जैसी कंपनियों के फर्जी आईपीओ में निवेश के नाम पर 6.83 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए। जब पीड़ित ने पैसे निकालने चाहे, तो उसे ठगी का अहसास हुआ।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीपी ऑपरेशंस शाहदरा की देखरेख और साइबर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर विजय कुमार के नेतृत्व में एसआई सुनील देव सिहाग, हेड कांस्टेबल रवि और संदीप की एक विशेष टीम गठित की गई। जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि ठगी की रकम में से 1.70 लाख रुपये ‘ट्रेवंता सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड’ नामक कंपनी के खाते में गए थे।

तफ्तीश में खुलासा हुआ कि यह कंपनी पूरी तरह से फर्जी थी और तुर्कमान गेट स्थित एक वर्चुअल ऑफिस से केवल ठगी के पैसे रूट करने के लिए चलाई जा रही थी। तकनीकी सर्विलांस की मदद से पुलिस ने आरोपियों का पीछा किया और 5 अप्रैल को पालम विलेज में छापेमारी कर शशिकांत शर्मा और दीपक को धर दबोचा। इनके पास से वारदात में इस्तेमाल ओप्पो और विवो के मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उनका मुख्य काम फर्जी कंपनियां बनाना और उनके नाम पर बैंक खाते खोलकर ठगी की रकम को ठिकाने लगाना था। वे इस मामले में पहले से गिरफ्तार अनिरुद्ध प्रताप सिंह के साथ मिलकर काम कर रहे थे। डीसीपी ने बताया कि इस सिंडिकेट ने किसी भी पीड़ित का पैसा वास्तव में निवेश नहीं किया, बल्कि फर्जी पोर्टफोलियो दिखाकर उन्हें गुमराह किया। फिलहाल पुलिस इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश और बाकी रकम की बरामदगी के लिए जांच कर रही है।

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