दिल्ली पुलिस ने तोड़ा साइबर ठगों का चक्रव्यूह, 1429 गिरफ्तार, 8371 से पूछताछ, 499 नई एफआईआर और 519 करोड़ का काला खेल उजागर

नई दिल्ली: देश में मासूम नागरिकों की गाढ़ी कमाई पर डाका डालने वाले साइबर अपराधियों के विरुद्ध दिल्ली पुलिस ने अब तक का सबसे भीषण और निर्णायक मोर्चा खोल दिया है। पुलिस आयुक्त सतीश गोलछा के निर्देशन में अंजाम दिए गए ऑपरेशन साय-हॉक ने साइबर अपराध की दुनिया में हड़कंप मचा दिया है। इस राष्ट्रव्यापी महत्व के अभियान के तहत दिल्ली पुलिस ने अभूतपूर्व कार्रवाई करते हुए कुल 1429 शातिर आरोपितों को गिरफ्तार किया या उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत पाबंद किया है। इसके साथ ही, पुलिस ने 8371 संदिग्धों को हिरासत में लेकर गहन पूछताछ की है, जिससे ठगी के कई नए और जटिल तौर-तरीकों का पर्दाफाश हुआ है। जांच में यह सनसनीखेज तथ्य उभरकर सामने आया है कि इस संगठित नेटवर्क ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दर्ज शिकायतों के अनुसार देशभर में लगभग 519 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि का वित्तीय फर्जीवाड़ा किया था। छापेमारी के दौरान पुलिस ने हजारों की संख्या में मोबाइल फोन, सक्रिय सिम कार्ड, लैपटॉप, डेबिट कार्ड और वित्तीय रजिस्टर बरामद किए हैं, जो इस काले कारोबार की रीढ़ थे।

रणनीतिक बदलाव और अभेद्य घेराबंदी

ऑपरेशन साय-हॉक दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली में एक बड़े रणनीतिक बदलाव का संकेत है। अब तक पुलिस केवल शिकायतों के आधार पर प्रतिक्रिया देती थी, लेकिन इस बार पुलिस आयुक्त सतीश गोलछा के नेतृत्व में प्रो-एक्टिव पुलिसिंग का रास्ता अपनाया गया। इस मिशन की सफलता के पीछे एक महीने की लंबी और गोपनीय तैयारी थी। गृह मंत्रालय के अधीन काम करने वाले भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के साथ मिलकर दिल्ली पुलिस ने डेटा का ऐसा जाल बुना कि ठगों को संभलने का मौका भी नहीं मिला। आई4सी द्वारा उपलब्ध कराए गए तकनीकी सहयोग और डेटा विश्लेषण की मदद से उन हॉटस्पॉट क्षेत्रों की मैपिंग की गई, जहां से ये अपराधी सक्रिय थे। विशेष आयुक्त मधुप तिवारी और अनिल शुक्ला के मैदानी पर्यवेक्षण में जेसीपी रजनीश गुप्ता और जेसीपी विजय सिंह की टीमों ने इस ऑपरेशन को अंजाम तक पहुंचाया।

वित्तीय तंत्र पर सर्जिकल स्ट्राइक

साइबर ठगी का पूरा खेल म्यूल अकाउंट्स यानी उन किराए के बैंक खातों पर टिका होता है, जिनमें ठगी की रकम जमा कराई जाती है। ऑपरेशन साय-हॉक का मुख्य उद्देश्य इसी वित्तीय रीढ़ को तोड़ना था। पुलिस ने पाया कि ठगों ने आम लोगों को चंद रुपयों का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए थे और उन्हीं खातों के जरिए करोड़ों रुपये इधर से उधर किए जा रहे थे। इस ऑपरेशन के दौरान 499 नई एफआईआर दर्ज की गईं, जबकि पहले से लंबित साइबर अपराध के 324 मामलों को सुलझाते हुए वांछित अपराधियों को दबोचा गया। पुलिस की तकनीकी टीम ने 3564 एनसीआरपी शिकायतों को सीधे तौर पर इन चिन्हित खातों और संदिग्ध मोबाइल नंबरों से जोड़ने में सफलता हासिल की है, जो अदालत में इन अपराधियों को कड़ी सजा दिलाने में मील का पत्थर साबित होगी।

कॉल सेंटरों और मददगारों पर शिकंजा

दबिश के दौरान पुलिस ने दिल्ली के विभिन्न इलाकों में अवैध रूप से चल रहे दर्जनों कॉल सेंटरों को भी न्यूट्रलाइज किया है। इन केंद्रों से फर्जी जॉब ऑफर, डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाना, टेलीमार्केटिंग और तकनीकी सहायता देने के बहाने लोगों को लूटा जा रहा था। पुलिस की कार्रवाई केवल गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इस सिंडिकेट को खाद-पानी देने वाले मददगारों पर भी शिकंजा कसा गया है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 35 के तहत 2203 ऐसे लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं, जो ठगी के इस खेल में बैकवर्ड लिंकेज यानी पर्दे के पीछे से मदद पहुंचा रहे थे। छापेमारी में बरामद किए गए डिजिटल साक्ष्यों का अब फॉरेंसिक ऑडिट कराया जा रहा है ताकि इस नेटवर्क के मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सके।

साइबर सुरक्षा का नया संकल्प

इस ऐतिहासिक अभियान की सफलता पर दिल्ली पुलिस आयुक्त सतीश गोलछा ने कहा कि ऑपरेशन साय-हॉक दिल्ली पुलिस की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है जिसके तहत हम तकनीक के जरिए नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संकल्पित हैं। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई केवल एक शुरुआत है और आने वाले समय में साइबर अपराधियों पर दबाव और भी बढ़ाया जाएगा। पुलिस ने नागरिकों के लिए एक विस्तृत परामर्श भी जारी किया है, जिसमें प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए मंत्र रुको, सोचो और फिर कदम उठाओ पर जोर दिया गया है। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी अनजान कॉल या मैसेज पर भरोसा न करें और किसी भी प्रकार के संदिग्ध लेन-देन की जानकारी तुरंत 1930 हेल्पलाइन या साइबर क्राइम पोर्टल पर दें। त्वरित सूचना देने से ठगी गई राशि को फ्रीज कराने में बड़ी मदद मिलती है।

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