महापौर राजा इकबाल सिंह ने स्वच्छता और बाढ़ प्रबंधन के लिए नए वाहनों को दिखाई हरी झंडी

नई दिल्ली: दिल्ली नगर निगम ने राजधानी की स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ करने और आगामी मानसून में जलभराव की चुनौती से निपटने के लिए अपने संसाधनों में भारी विस्तार किया है। महापौर सरदार राजा इकबाल सिंह ने आज निगम द्वारा खरीदे गए अत्याधुनिक वाहनों के नए बेड़े को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस बेड़े में 16 बैकहो लोडर (जेसीबी), 2 फ्लड कंट्रोल इमरजेंसी वाहन और 6 मैकेनिकल रोड स्वीपर शामिल हैं। इस अवसर पर स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा, पर्यावरण प्रबंधन समिति के अध्यक्ष संदीप कपूर और निगम आयुक्त संजीव खिरवार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महापौर सरदार राजा इकबाल सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा और मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली अब विकास की पटरी पर लौट आई है। उन्होंने पिछली सरकारों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पहले काम सिर्फ विज्ञापनों में दिखता था, लेकिन अब अधिकारी दफ्तरों से निकलकर फील्ड में मेहनत कर रहे हैं। महापौर ने दिल्लीवासियों को आश्वस्त किया कि इस बार मानसून में सड़कों पर जलभराव का पुराना नजारा देखने को नहीं मिलेगा। उन्होंने बताया कि नए ‘फ्लड कंट्रोल’ वाहनों में प्रति मिनट 10,000 लीटर पानी निकालने की क्षमता है, जिससे बाढ़ जैसी स्थिति में त्वरित राहत मिल सकेगी।

तकनीकी विशिष्टताओं की जानकारी देते हुए महापौर ने बताया कि इन सभी मशीनों की गुणवत्ता की जांच आईआईटी दिल्ली द्वारा की गई है। 87.02 लाख रुपये की लागत वाले फ्लड कंट्रोल वाहनों का संचालन अगले 15 वर्षों तक ओएंडएम मॉडल पर किया जाएगा। इसके अलावा, धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए 58.69 लाख रुपये की लागत वाली 6 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें भी शामिल की गई हैं, जो उच्च यातायात वाले क्षेत्रों में सफाई कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगी। साथ ही, 16 नए बैकहो लोडर जुड़ने से निगम के पास अब इनकी कुल संख्या 68 हो गई है, जिससे कचरा लोडिंग की गति तेज होगी।

स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने इसे निगम की कार्यप्रणाली को वैज्ञानिक बनाने की दिशा में एक अहम कदम बताया। उन्होंने कहा कि चरणबद्ध तरीके से आगे भी विश्वस्तरीय मशीनें बेड़े में जोड़ी जाएंगी। वहीं, पर्यावरण प्रबंधन समिति के अध्यक्ष संदीप कपूर ने कहा कि मशीनीकरण से मैनुअल श्रम पर निर्भरता कम होगी और कचरा प्रबंधन समयबद्ध तरीके से संभव होगा। निगम के इस कदम से न केवल सफाई व्यवस्था में सुधार होगा, बल्कि आपातकालीन स्थितियों में जनता को त्वरित सहायता मिल सकेगी, जो दिल्ली को एक स्वच्छ और सुरक्षित वैश्विक शहर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

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