विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस पर सफदरजंग अस्पताल में ‘जागरूकता मार्च’, नीले गुब्बारे उड़ाकर दिया एकजुटता का संदेश

नई दिल्ली: विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस के पावन अवसर पर वीएमएमसी और सफदरजंग अस्पताल के फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन विभाग द्वारा एक भव्य ‘जागरूकता मार्च’ का आयोजन किया गया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य ऑटिज्म से प्रभावित व्यक्तियों के प्रति समाज में समझ, स्वीकार्यता और समावेशिता को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम का शुभारंभ अस्पताल की निदेशक डॉ. कविता शर्मा ने नीले गुब्बारे हवा में उड़ाकर किया, जो ऑटिज्म के प्रति आशा, जागरूकता और एकजुटता का प्रतीक माने जाते हैं।

इस अवसर पर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. चारू बांबा और प्रिंसिपल डॉ. गीतिका खन्ना की गरिमामयी उपस्थिति रही। इनके साथ ही एडिशनल एमएस डॉ. शिशिर चंदन, ओपीडी प्रभारी डॉ. जयंती मणि, डीडीए गणेश कुमार, पीएमआर विभागाध्यक्ष डॉ. अजय गुप्ता और मनोरोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. पंकज वर्मा ने भी कार्यक्रम में शिरकत की। सुशक्ति चैरिटेबल ट्रस्ट के सहयोग से आयोजित इस वॉक में बड़ी संख्या में स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों, छात्रों, कर्मचारियों और समुदाय के सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और ऑटिज्म पीड़ितों के अधिकारों के लिए आवाज बुलंद की।

समारोह को संबोधित करते हुए निदेशक डॉ. कविता शर्मा ने कहा कि ऑटिज्म से प्रभावित व्यक्तियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए शुरुआती पहचान, समय पर हस्तक्षेप और सामुदायिक जागरूकता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने एक ऐसे करुणामय और समावेशी समाज के निर्माण पर जोर दिया जो न्यूरोडाइवर्सिटी का समर्थन करे और इन व्यक्तियों को अपनी पूरी क्षमता तक पहुँचने के लिए सशक्त बनाए।

पीएमआर विभाग के अध्यक्ष डॉ. अजय गुप्ता ने विभाग की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि वे ऑटिज्म प्रभावितों को समग्र पुनर्वास सेवाएं प्रदान करने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं, ताकि उनकी कार्यात्मक स्वतंत्रता और समग्र कल्याण सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने इस पुनीत कार्य में निरंतर सहयोग के लिए सुशक्ति चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री विजय का आभार व्यक्त किया। यह जागरूकता मार्च संस्थान की समग्र स्वास्थ्य देखभाल, समावेशिता और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक बनकर उभरा।

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