क्राइम ब्रांच ने ट्रैक किए 114 चोरी व गुमशुदा मोबाइल, मालिकों को सौंपे

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की विभिन्न इकाइयों ने ‘सिटीजन-सेंट्रिक पुलिसिंग’ की दिशा में शानदार प्रदर्शन करते हुए बड़ी संख्या में गुमशुदा और चोरी हुए मोबाइल फोन बरामद किए हैं। क्राइम ब्रांच की एंटी-गैंग स्क्वाड, सदर्न रेंज और नॉर्दर्न रेंज-II की टीमों ने तकनीकी सर्विलांस और जमीनी जांच के जरिए कुल 114 मोबाइल फोन ट्रैक किए। इनमें से बड़ी संख्या में फोन 27 मार्च को आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान उनके वास्तविक मालिकों को वापस सौंप दिए गए।

जॉइंट कमिश्नर (क्राइम) सुरेंद्र कुमार ने बताया कि आज के डिजिटल युग में मोबाइल सिर्फ संचार का साधन नहीं, बल्कि व्यक्तिगत डेटा और वित्तीय जानकारी का खजाना है। इसे ध्यान में रखते हुए एंटी-गैंग स्क्वाड ने इस साल अब तक 33 मोबाइल बरामद किए, जिनमें से 19 मालिकों को लौटा दिए गए हैं। इस सफलता में महिला हेड कांस्टेबल रूबी और उनकी टीम की विशेष भूमिका रही, जिन्होंने भारत सरकार के CEIR पोर्टल का प्रभावी ढंग से उपयोग किया।

वहीं, सदर्न रेंज की टीम ने एसीपी स्वागत पाटिल के नेतृत्व में महज 15 दिनों के भीतर 31 मोबाइल फोन ट्रैक किए। इनमें से 10 फोन शुक्रवार को उनके मालिकों को सौंपे गए। इसी तरह, नॉर्दर्न रेंज-II की टीम ने भी सराहनीय कार्य करते हुए पिछले 25 दिनों में 50 मोबाइल फोन बरामद किए और उन सभी को 27 मार्च को उनके मालिकों के हवाले कर दिया। अपना खोया हुआ फोन वापस पाकर लोगों ने दिल्ली पुलिस के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया, क्योंकि कई फोन में उनका महत्वपूर्ण पेशेवर और निजी डेटा सुरक्षित था।

क्राइम ब्रांच के अधिकारियों का कहना है कि मोबाइल फोन खोने से न केवल वित्तीय हानि होती है, बल्कि मानसिक तनाव भी बढ़ता है। पुलिस की इन टीमों ने अपनी तकनीकी दक्षता और टीम वर्क के जरिए आम जनता की इस समस्या का समाधान किया है। इस अभियान ने न केवल लोगों के डेटा और यादों को सुरक्षित किया है, बल्कि पुलिसिंग सिस्टम में सार्वजनिक विश्वास को भी सुदृढ़ किया है। क्राइम ब्रांच की यह मुहिम आने वाले समय में भी इसी सक्रियता के साथ जारी रहेगी।

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