यूपी के कैराना में चला रहा था अवैध हथियार फैक्ट्री, 50 हजार के इनामी सप्लायर को पुलिस ने दबोचा

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (एंटी गैंगस्टर स्क्वाड – AGS) ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने उत्तर प्रदेश के शामली जिले के रहने वाले एक कुख्यात और इनामी हथियार सप्लायर मोहम्मद इसरार उर्फ कट्टा (52 वर्ष) को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर दिल्ली पुलिस ने 50,000 रुपये और हरियाणा पुलिस ने 5,000 रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। वह हत्या, डकैती और आर्म्स एक्ट के आधा दर्जन से अधिक मामलों में वांछित था और कोर्ट द्वारा उसे भगोड़ा घोषित किया जा चुका था।

डीसीपी (क्राइम) हर्ष इंदोरा ने बताया कि यह ऑपरेशन तब शुरू हुआ जब अगस्त 2024 में क्राइम ब्रांच ने अंकित नाम के एक शूटर को अत्याधुनिक पिस्तौलों और कारतूसों के साथ पकड़ा था। जांच में खुलासा हुआ कि उसे हथियारों की सप्लाई शामली के मोहम्मद इसरार ने की थी। तभी से पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी। एसीपी भगवती प्रसाद के मार्गदर्शन और इंस्पेक्टर कृष्ण कुमार के नेतृत्व में गठित एजीएस की टीम ने तकनीकी निगरानी और गुप्त सूचना के आधार पर 25 मार्च को दिल्ली-लोनी बॉर्डर के पास जाल बिछाया और आरोपी को एक सिंगल शॉट पिस्तौल के साथ धर दबोचा।

पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इसरार ने स्वीकार किया कि उसने जुलाई 2024 में सोनीपत के गोहाना में हुए जयपाल उर्फ दुधिया की नृशंस हत्या के लिए अंकित और उसके साथियों को .30 और .32 बोर की पिस्तौलें मुहैया कराई थीं। इसके अलावा, साल 2017 में जींद में एक मुर्गी फार्म व्यवसायी की हत्या कर 22 लाख की लूट और 2018 में जुलाना स्थित पंजाब नेशनल बैंक में हुई डकैती में भी इसी के द्वारा सप्लाई किए गए हथियारों का इस्तेमाल हुआ था। आरोपी कैराना में अपनी एक अवैध हथियार बनाने वाली फैक्ट्री भी चला रहा था, जिसे कुछ समय पहले ही पुलिस ने ध्वस्त किया था।

आरोपी का प्रोफाइल बताता है कि वह पेशे से कारपेंटर है और केवल 5वीं तक पढ़ा है। दो शादियों से उसके 10 बच्चे हैं। आर्थिक तंगी के चलते वह अपराधियों के संपर्क में आया और धीरे-धीरे अवैध हथियार बनाने और उनकी सप्लाई करने के धंधे में उतर गया। जेल जाने के दौरान उसका संपर्क बड़े गैंगस्टरों से हुआ, जिसके बाद वह दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा के संगठित अपराधी गिरोहों को थोक में हथियार सप्लाई करने लगा। फिलहाल पुलिस उससे पूछताछ कर रही है ताकि उसके नेटवर्क से जुड़े अन्य अपराधियों और उसके द्वारा सप्लाई किए गए हथियारों के खरीदारों का पता लगाया जा सके।

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