दुबई से संचालित बड़े इन्वेस्टमेंट फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़, साइबर पुलिस ने महाराष्ट्र से दबोचे 5 जालसाज

नई दिल्ली: दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम जिले की साइबर थाना पुलिस ने निवेश के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले एक बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए 5 शातिर साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इस मामले में श्रीधर दिलीप इंगले (25 वर्ष), अर्चिरयन गोरक्ष कांबले (21 वर्ष), अजीज मीरन शेख (25 वर्ष), प्रणव जालिंदर गुलदगड (24 वर्ष) और विशाल दुर्गादास बाछल (25 वर्ष) को महाराष्ट्र से गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से वारदात में इस्तेमाल 6 मोबाइल फोन और अपराध के लिए इस्तेमाल किए गए 35 बैंक खातों का विवरण बरामद किया गया है। यह गैंग फर्जी कंपनियों के जरिए शेयर बाजार में निवेश का झांसा देकर लोगों की गाढ़ी कमाई लूट रहा था।

दक्षिण-पश्चिम जिले के डीसीपी अमित गोयल ने बताया कि 4 सितंबर 2025 को एन. राय नामक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई थी कि ‘नेक्स्ट बिलियन टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड’ नामक फर्जी कंपनी के जरिए उनसे 12,22,670 रुपये की ठगी की गई है। पीड़ितों को स्टॉक मार्केट में ऊंचे रिटर्न का लालच देकर ‘ओटीसी’ अकाउंट खुलवाया गया और फिर परिणीति जैन व उसके सहयोगियों ने अलग-अलग नंबरों से संपर्क कर पैसे ट्रांसफर करवा लिए। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीपी संघमित्रा और साइबर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर प्रवेश कौशिक के नेतृत्व में एसआई सोमबीर, हेड कांस्टेबल जितेंद्र, संदीप और मयूरपाल की टीम गठित की गई। तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल सबूतों के आधार पर पुलिस की टीम महाराष्ट्र के श्रीरामपुर पहुंची और छापेमारी कर मुख्य आरोपी श्रीधर को दबोच लिया।

पूछताछ के दौरान आरोपी श्रीधर ने बताया कि वह दुबई में बैठे अपने साथी चैतन्य के लिए कमीशन पर ‘म्यूल बैंक अकाउंट’ का इंतजाम करता था। उसके अन्य चार साथी अलग-अलग लोगों से बैंक खाते हासिल करने में उसकी मदद करते थे। डीसीपी ने बताया कि पुलिस ने जाल बिछाकर बाकी चारों सह-आरोपियों को भी अलग-अलग ठिकानों से गिरफ्तार कर लिया। जांच में सामने आया कि इन खातों के जरिए अब तक करोड़ों रुपये का फर्जी लेनदेन किया जा चुका है और इनका जाल कई राज्यों में फैला हुआ है।

पकड़े गए आरोपियों का मॉडस ऑपरेंडी यह था कि वे भोले-भले लोगों से उनके बैंक खाते कमीशन के लालच में लेते थे और फिर उन्हें साइबर फ्रॉड सिंडिकेट को सौंप देते थे। इन खातों का नियंत्रण दुबई से किया जा रहा था। पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि यह गैंग एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज 18 अन्य शिकायतों से भी जुड़ा हुआ है। पुलिस अब दुबई में बैठे इनके मुख्य सरगना चैतन्य तक पहुंचने के लिए तकनीकी साक्ष्यों का सहारा ले रही है और अन्य फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है।

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