एमसीडी ने रेलवे वैगनों से हटाया दया बस्ती का 250 मीट्रिक टन लेगेसी कचरा

नई दिल्ली: दिल्ली के घनी आबादी वाले और संकरे रास्तों वाले इलाकों में कूड़ा निस्तारण की समस्या से निपटने के लिए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने एक क्रांतिकारी मॉडल पेश किया है। एमसीडी के करोल बाग जोन ने दया बस्ती रेलवे स्टेशन परिसर में जमा वर्षों पुराने ‘लेगेसी वेस्ट’ (पुराना जमा कचरा) को हटाने के लिए पहली बार रेलवे लॉजिस्टिक्स का प्रभावी उपयोग किया है। सोमवार को इस विशेष अभियान के तहत कुल 10 बीआरएन वैगनों की मदद से लगभग 250 मीट्रिक टन कचरे को सफलतापूर्वक लोड कर गंतव्य के लिए रवाना किया गया।

दया बस्ती रेलवे स्टेशन का क्षेत्र अपनी भौगोलिक स्थिति और संकरी गलियों के कारण स्वच्छता अभियान के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ था। यहां पारंपरिक ट्रकों या भारी वाहनों का पहुंचना लगभग असंभव था, जिससे लंबे समय से कचरा जमा हो रहा था। इस गंभीर लॉजिस्टिक चुनौती से निपटने के लिए निगम ने रेलवे के साथ समन्वय कर वैगनों के जरिए कचरा परिवहन की रणनीति बनाई। निर्धारित रेलवे लाइन ब्लॉकेज के दौरान वरिष्ठ जोनल अधिकारियों की सीधी निगरानी में लोडिंग का कार्य संपन्न किया गया, जिससे क्षेत्र को कूड़े के ढेर से मुक्ति मिली।

करोल बाग जोन के उपायुक्त दिलखुश मीणा ने इस सफलता पर जानकारी देते हुए बताया कि यह दिल्ली में अपनी तरह का पहला मॉडल है। उन्होंने कहा कि संकरे रास्तों वाले शहरी क्षेत्रों में जहां पारंपरिक मशीनरी काम नहीं कर पाती, वहां रेलवे लॉजिस्टिक्स एक गेम-चेंजर साबित हुआ है। यह पहल न केवल कचरा हटाने की प्रक्रिया को तेज करती है, बल्कि घनी आबादी वाले क्षेत्रों में प्रदूषण और बीमारियों के खतरे को भी कम करने में सहायक है।

निगम अधिकारियों के अनुसार, यह प्रयोग भविष्य के लिए एक उदाहरण पेश करता है। आने वाले समय में दिल्ली के अन्य दुर्गम और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी इसी तरह के रेल आधारित मॉडलों का उपयोग कर स्वच्छता सुनिश्चित की जाएगी। एमसीडी का लक्ष्य है कि इस प्रकार के नवाचारों के जरिए घनी आबादी वाले इलाकों के निवासियों को एक स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण प्रदान किया जा सके। इस सफल अभियान के बाद दया बस्ती स्टेशन और आसपास के निवासियों ने राहत की सांस ली है।

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