अवैध कब्जा हटाकर इन लोगों को दिए जाएंगे कांशीराम आवास, CM योगी का बड़ा आदेश

राष्ट्रीय जजमेंट न्यूज

गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को सस्ती दर पर रहने के लिए घर देने के उद्देश्य से ‘कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना’ शुरू की गई थी. यह योजना 2008 से 2009 के बीच बहुजन समाज पार्टी (BSP) की सरकार और तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती के कार्यकाल में शुरू हुई थी.
इस योजना का मकसद शहरों में रहने वाले गरीब परिवारों, खासकर दलित और कमजोर वर्गों को पक्के मकान उपलब्ध कराना था. इसके तहत कई शहरों और नगर निकायों में फ्लैट और छोटे-छोटे आवास बनाए गए, ताकि झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोगों को बेहतर जीवन मिल सके.

बदलते समय के साथ अवैध कब्जा करने लगे लोग

मगर, बदलते समय के साथ कई जिलों में बने इन कांशीराम आवासों पर अवैध कब्जे की शिकायतें सामने आने लगीं. कई जगह ऐसे लोग भी रहने लगे जो योजना के असली पात्र नहीं थे. इस कारण जिन गरीब परिवारों के लिए ये घर बनाए गए थे, उन्हें इनका लाभ नहीं मिल पा रहा था. सरकार को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि आवासों में गलत तरीके से लोग रह रहे हैं और कई फ्लैट खाली भी पड़े हैं. इसी स्थिति को देखते हुए योगी सरकार ने अब इन आवासों की दोबारा जांच कराने का फैसला किया है.

योगी सरकार का फैसला: अवैध कब्जे होंगे खाली

मंगलवार (10 मार्च, 2026) को हुई कैबिनेट बैठक में सीएम योगी ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि कांशीराम आवासों में जहां-जहां अवैध कब्जा है, उन्हें तुरंत खाली कराया जाए. सरकार का कहना है कि इन मकानों को सही लोगों तक पहुंचाना जरूरी है. खाली कराए गए आवासों को दोबारा ठीक कराया जाएगा, उनमें रंगाई-पुताई कराई जाएगी और फिर उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर दलित परिवारों को दिया जाएगा. सरकार का मानना है कि इससे योजना का असली उद्देश्य पूरा होगा और जरूरतमंद लोगों को रहने के लिए सुरक्षित घर मिल पाएगा.

बिजली के लिए 2000 करोड़ रुपये के ऋण को मंजूरी

कैबिनेट बैठक में सिर्फ आवास का मुद्दा ही नहीं बल्कि बिजली व्यवस्था को लेकर भी अहम फैसला लिया गया. गर्मियों के मौसम में बिजली की मांग काफी बढ़ जाती है, इसलिए सरकार ने बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पावर कॉरपोरेशन को 2000 करोड़ रुपये का ऋण दिलाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी. यह ऋण उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव बैंक के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा. सरकार का उद्देश्य है कि गर्मी के दिनों में लोगों को बिजली की कमी का सामना न करना पड़े और सप्लाई सुचारु रूप से चलती रहे.

कैबिनेट में और भी जरूरी प्रस्ताव भी पास

बैठक में कुछ अन्य प्रशासनिक फैसले भी लिए गए. इनमें विधानमंडल के शीतकालीन सत्र का सत्रावसान, भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की वर्ष 2025 की रिपोर्ट को विधानमंडल के सामने पेश करने से पहले राज्यपाल की अनुमति लेने का प्रस्ताव शामिल है. इसके अलावा, पीएसी वाहिनी के पुराने और बेकार हो चुके वाहनों की जगह 46 नए वाहनों की खरीद का प्रस्ताव भी पास किया गया. कुल मिलाकर सरकार ने एक तरफ गरीबों को आवास दिलाने की दिशा में कदम बढ़ाया है तो दूसरी तरफ प्रशासनिक और बुनियादी व्यवस्थाओं को भी मजबूत करने का प्रयास किया है.

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