स्टॉक मार्केट निवेश के नाम पर ₹17.1 लाख की ठगी करने वाले 4 जालसाज गिरफ्तार; गेमिंग ऐप्स के जरिए छिपाते थे धन का स्रोत

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस के उत्तर-पश्चिम जिला की साइबर थाना टीम ने स्टॉक मार्केट में ऊँचे रिटर्न का लालच देकर करोड़ों की धोखाधड़ी करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में इंदरजीत (38 वर्ष), पवन कुमार (38 वर्ष) और गौरव त्यागी (25 वर्ष) को गिरफ्तार किया है, जबकि महिमा शर्मा (24 वर्ष) को विधिक प्रावधानों के तहत पाबंद किया गया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से अपराध में प्रयुक्त तीन मोबाइल फोन बरामद किए हैं। जांच में सामने आया है कि इन ठगों ने शालीमार बाग के एक किराना दुकानदार से ₹17.10 लाख की ठगी की थी। इनके द्वारा इस्तेमाल किए गए आरबीएल बैंक खाते के विरुद्ध देश भर में 17 NCRP शिकायतें पहले से दर्ज पाई गई हैं।

उत्तर-पश्चिम जिले के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त भीष्म सिंह ने बताया कि शालीमार बाग निवासी योगेश कुमार ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्हें एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़कर स्टॉक मार्केट में निवेश पर भारी मुनाफे का झांसा दिया गया। ठगों ने उन्हें एक लिंक के जरिए फर्जी पंजीकरण कराया और विभिन्न किस्तों में कुल ₹17.10 लाख जमा करवा लिए। जब योगेश ने अपना पैसा निकालने का प्रयास किया, तो उनसे और अधिक राशि की मांग की गई, जिससे उन्हें ठगी का एहसास हुआ। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीपी साइबर राजीव कुमार और एसएचओ इंस्पेक्टर दिनेश दहिया के नेतृत्व में एसआई राहुल, निधि मलिक और अन्य जवानों की टीम गठित की गई।

वित्तीय विश्लेषण के दौरान पुलिस को पता चला कि ठगी की गई राशि इंदरजीत द्वारा संचालित एक फर्म के ‘म्यूल अकाउंट’ में ट्रांसफर की गई थी। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर छापेमारी कर आरोपियों को पूर्वी दिल्ली और गाजियाबाद से दबोच लिया। पूछताछ में मुख्य आरोपी इंदरजीत ने स्वीकार किया कि उसने कमीशन के बदले अपना चालू खाता साइबर ठगों को उपलब्ध कराया था। पवन कुमार इस धंधे में बैंक खातों की व्यवस्था करने वाले मध्यस्थ के रूप में काम करता था, जबकि गौरव त्यागी पूरे नेटवर्क के संचालन और समन्वय में सहयोग करता था।

गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद शातिर थी। वे ठगी की रकम को ‘म्यूल बैंक खातों’ में प्राप्त करने के तुरंत बाद उसे गेमिंग ऐप्स और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से विभिन्न खातों में स्थानांतरित कर देते थे ताकि धन के वास्तविक स्रोत को छिपाया जा सके और पुलिस को गुमराह किया जा सके। पाबंद की गई आरोपी महिमा शर्मा इंदरजीत के साथ संयुक्त खाताधारक थी। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सहयोगियों और लाभार्थियों की पहचान करने में जुटी है। इस कार्रवाई से साइबर पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क को बाधित करने में सफलता पाई है। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है।

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