सोशल मीडिया पर सस्ते क्रिप्टो डील के बहाने छात्र को बुलाया और गनपॉइंट पर लूटा; दिल्ली पुलिस ने मास्टरमाइंड समेत 7 को दबोचा

नई दिल्ली: बाहरी दिल्ली के पश्चिम विहार ईस्ट थाना पुलिस ने एक सनसनीखेज ‘ब्लाइंड डकैती’ के मामले को महज 48 घंटों के भीतर सुलझाते हुए एक शातिर अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस ऑपरेशन में पुलिस ने गिरोह के मुख्य सरगना अमित जैन (31) सहित कुल 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जिनमें अमित उर्फ रेसर, प्रीतपाल, अभय, निशांत, शिवम और हर्ष शामिल हैं। पुलिस ने इनके कब्जे से लूटी गई राशि में से ₹1.45 लाख नकद, वारदात में इस्तेमाल एक अत्याधुनिक पिस्तौल, तीन जिंदा कारतूस, एक कार, एक मोटरसाइकिल, एक स्कूटी, एक लैपटॉप और 11 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। यह गिरोह इंस्टाग्राम पर सस्ते दामों पर क्रिप्टोकरेंसी बेचने का झांसा देकर भोली-भाली जनता को सुनसान जगहों पर बुलाता था और फिर हथियार के बल पर लूट की वारदात को अंजाम देता था।

बाहरी जिले के डीसीपी सचिन शर्मा ने बताया कि 22 फरवरी को द्वारका स्थित एनएसआईटी के एक बी.टेक छात्र ने शिकायत दर्ज कराई थी। छात्र को स्कॉलरशिप के ₹2 लाख मिले थे, जिन्हें वह क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करना चाहता था। इंस्टाग्राम पर एक लुभावना विज्ञापन देखकर उसने कथित डीलर से संपर्क किया। आरोपियों ने उसे डील के लिए पश्चिम विहार ईस्ट मेट्रो स्टेशन के पास बुलाया। जैसे ही छात्र अपनी कार से वहां पहुँचा, एक आरोपी पिस्तौल तानकर उसकी कार में घुस गया, जबकि 5-6 अन्य साथियों ने कार को बाहर से घेर लिया। बदमाश छात्र से ₹1.83 लाख लूटकर फरार हो गए।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीपी स्वागत पाटिल राजकुमार के मार्गदर्शन और कार्यवाहक थाना प्रभारी इंस्पेक्टर राजपाल के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। इस टीम में इंस्पेक्टर सुंदर सिंह, एसआई गौरव गहलोत, एएसआई प्रवीण और हेड कांस्टेबल कुलदीप व विनोद शामिल थे। टीम ने घटनास्थल के आसपास के दर्जनों सीसीटीवी फुटेज खंगाले और तकनीकी निगरानी के जरिए आरोपियों के भागने के रास्ते को ट्रैक किया। गुप्त सूचना और सटीक लोकेशन के आधार पर पुलिस ने सबसे पहले नरेला से ‘अमित उर्फ रेसर’ और ‘प्रीतपाल’ को दबोचा, जिनसे पूछताछ के बाद कड़ियाँ जुड़ती गईं और पूरी टीम सलाखों के पीछे पहुँच गई।

पूछताछ के दौरान गिरोह के मास्टरमाइंड अमित जैन ने चौंकाने वाले खुलासे किए। वह दिल्ली के पहाड़ी धीरज का रहने वाला है और दुबई में चावल निर्यात का बड़ा व्यवसाय करता था। व्यापार में उसे लगभग ₹62 लाख का भारी घाटा हुआ था। इस घाटे की भरपाई के लिए उसने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर फर्जी पेज बनाए और सस्ते क्रिप्टो का जाल बिछाया। उसने लूट की वारदातों को अंजाम देने के लिए रोहिणी और मुबराकपुर डबास क्षेत्र के लड़कों को लालच देकर गिरोह में शामिल किया था। उसने तीन सगे भाइयों (निशांत, शिवम और हर्ष) को भी इस डकैती के लिए दस हजार रूपए प्रति व्यक्ति के हिसाब से काम पर रखा था।

पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह केवल पश्चिम विहार ही नहीं, बल्कि दिल्ली के अन्य जिलों में भी सक्रिय था। इस गैंग की गिरफ्तारी से नेताजी सुभाष प्लेस, बुध विहार और शाहबाद डेयरी में हुई इसी तरह की डकैती और गनपॉइंट रॉबरी की कई वारदातें सुलझ गई हैं। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन्होंने अब तक कुल कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है। फिलहाल सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और आगे की विधिक कार्रवाई जारी है।

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