‘डिजिटल अरेस्ट’ कर बुजुर्ग महिला से 16 लाख ठगने वाले 3 अपराधी राजस्थान से गिरफ्तार, कंबोडिया तक जुड़े तार

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस के साउथ-वेस्ट जिला की साइबर थाना टीम ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर बुजुर्ग नागरिकों को निशाना बनाने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने राजस्थान के जयपुर और कोटपूतली में छापेमारी कर तीन शातिर साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। इस गिरोह ने दिल्ली की एक 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला को उनके बेटे पर झूठा आपराधिक केस होने का डर दिखाकर दो दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ रखा और उनसे 16 लाख रुपये की ठगी कर ली।

दक्षिण-पश्चिम जिले के डीसीपी अमित गोयल ने बताया कि 7 दिसंबर 2025 को एक बुजुर्ग महिला ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्हें एक व्हाट्सएप कॉल आया, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को सीबीआई इंस्पेक्टर बताया। ठग ने महिला को डराया कि उनका बेटा एक गंभीर मामले में फंस गया है और उसे बचाने के लिए पैसे देने होंगे। आरोपियों ने महिला को दो दिनों तक वीडियो कॉल के जरिए “डिजिटल अरेस्ट” में रखा और निरंतर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर उनसे 16 लाख रुपये विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीपी ऑपरेशंस विजय कुमार के मार्गदर्शन और साइबर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर प्रवेश कौशिक के नेतृत्व में एसआई चेतन राणा, हेड कांस्टेबल मनेंद्र और विजयपाल की एक विशेष टीम गठित की गई। टीम ने डिजिटल फुटप्रिंट, सिम ट्रैकिंग और मनी ट्रेल का विश्लेषण किया, जिससे पता चला कि यह गिरोह राजस्थान के जयपुर से संचालित हो रहा है। पुलिस ने सबसे पहले कोटपूतली से योगेंद्र गुर्जर (19) को पकड़ा, जो अनपढ़ लोगों के नाम पर म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराता था।

योगेंद्र से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने जयपुर के सांगानेर में एक किराए के मकान पर छापेमारी की और मुख्य सरगना राकेश मीणा (25) और छोटू लाल मीणा (20) को धर दबोचा। जांच में खुलासा हुआ कि यह सिंडिकेट कंबोडिया में बैठे अंतरराष्ट्रीय मास्टरमाइंड्स के लिए काम कर रहा था। आरोपी टेलीग्राम और इंस्टाग्राम के जरिए खातों की जानकारी साझा करते थे। ठगी की रकम इन खातों में आने के बाद उसे एटीएम या चेक के जरिए निकालकर दूसरे खातों में भेज दिया जाता था ताकि पुलिस को सुराग न मिल सके।

पुलिस ने आरोपियों के पास से 1 लाख रुपये नकद, 9 मोबाइल फोन और 10 पासबुक/चेकबुक बरामद की हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि ये आरोपी न केवल डिजिटल अरेस्ट, बल्कि निवेश धोखाधड़ी और अन्य साइबर अपराधों में भी लिप्त थे। फिलहाल पुलिस इस नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की जांच कर रही है और अन्य शामिल एजेंटों की तलाश जारी है।

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