डिजिटल अरेस्ट का बड़ा खेल: फरीदाबाद में 2.13 करोड़ की ठगी, पुलिस ने महाराष्ट्र से दबोचे तीन जालसाज

फरीदाबाद: साइबर थाना बल्लभगढ़ की टीम ने डिजिटल अरेस्ट के जरिए 2 करोड़ 13 लाख 16 हजार रुपये की रिकॉर्ड ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर महाराष्ट्र के ठाणे (प्रकाश नगर) से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान पंकज सुहास कांटे, सौरभ देव कुल्ले और अजय दामोदर भगत के रूप में हुई है। यह कार्रवाई सेक्टर-64सी निवासी एक व्यक्ति की शिकायत पर की गई, जिसे जालसाजों ने मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे केस में फंसाकर करोड़ों रुपये ऐंठ लिए थे। पुलिस टीम अब आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर फरीदाबाद ला रही है।

पुलिस प्रवक्ता यशपाल ने बताया कि ठगों ने पीड़ित की पत्नी को कॉल कर खुद को टेलीकॉम अधिकारी बताया और दावा किया कि उनके आधार कार्ड से जुड़े खाते में मनी लॉन्ड्रिंग के 20 लाख रुपये आए हैं। इसके बाद डराने के लिए कॉल को कथित ‘मुंबई क्राइम ब्रांच’ को ट्रांसफर कर दिया गया। आरोपियों ने दंपति को कई दिनों तक वीडियो कॉल के जरिए ‘डिजिटल अरेस्ट’ रखा और घर से बाहर न जाने की हिदायत दी। खौफ पैदा करने के लिए ठगों ने सुप्रीम कोर्ट, ईडी और डायरेक्टर ऑफ एनफोर्समेंट के नाम से फर्जी ‘फ्रीजिंग फंड्स कंट्रोल ऑर्डर’ और ‘अरेस्ट वारंट’ तक भेज दिए। गिरफ्तारी के डर से पीड़ित ने आरोपियों के बताए खातों में कुल 2.13 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए। ठगों की शातिरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने पैसे मिलने के बाद फर्जी ‘NOC’ और ‘PCC’ भेजकर पीड़ित को केस से बरी होने का नाटक भी किया।

जांच में खुलासा हुआ कि पकड़े गए आरोपी मुख्य ठगों के लिए तकनीकी सहायता का काम करते थे। उनके पास से एक ऐसी हाईटेक डिवाइस बरामद हुई है, जिसमें एक साथ 250 से अधिक सिम कार्ड संचालित किए जा सकते थे। आरोपी इसी डिवाइस के जरिए सिम सक्रिय कर ठगी की वारदातों को अंजाम देने में मदद करते थे। पुलिस अब आरोपियों को अदालत में पेश कर रिमांड पर लेगी, ताकि गिरोह के मुख्य सरगना और ठगी गई राशि की बरामदगी की जा सके। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी वीडियो कॉल से डरें नहीं और ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी स्थिति होने पर तुरंत 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।

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