अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट का पर्दाफाश; क्राइम ब्रांच ने मुंद्रा पोर्ट से जब्त की 9 करोड़ की नशीली गोलियां, 5 गिरफ्तार

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (सेंट्रल रेंज) ने नशीली दवाओं के एक विशाल अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट को ध्वस्त करते हुए अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी में से एक को अंजाम दिया है। पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से कुल 18,47,400 नशीली गोलियां बरामद की हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन दवाओं की कीमत लगभग 8 से 9 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह गिरोह घरेलू सामान की आड़ में इन प्रतिबंधित दवाओं को भारत से यूनाइटेड किंगडम भेजने की फिराक में था।

डीसीपी (क्राइम-II) विक्रम सिंह और एडिशनल डीसीपी राजबीर मलिक के नेतृत्व में इंस्पेक्टर सुनील कुमार कालखंडे और वीर सिंह की टीम ने इस सफल ऑपरेशन को अंजाम दिया। इस पूरी जांच की शुरुआत 7 अक्टूबर 2025 को मदनपुर खादर से मोहम्मद आबिद की गिरफ्तारी से हुई थी, जिसके पास से महज 14.4 किलो ट्रामाडोल गोलियां मिली थीं। लेकिन जब पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और गहन पूछताछ के जरिए कड़ियां जोड़ना शुरू किया, तो सप्लाई चेन का एक-एक सिरा खुलता चला गया। आबिद से जावेद, फिर सुनील कुमार और विष्णु दत्त शर्मा होते हुए पुलिस इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के मास्टरमाइंड तक पहुँच गई।

जांच के दौरान खुलासा हुआ कि मुख्य आरोपी विष्णु दत्त शर्मा ने ‘घरेलू सामान’ बताकर एक कंटेनर ब्रिटेन भेजने के लिए बुक किया था, जिसमें 32 बक्सों में ट्रामाडोल और अन्य प्रतिबंधित गोलियां छिपाई गई थीं। क्राइम ब्रांच ने तुरंत तत्परता दिखाते हुए कस्टम अधिकारियों से संपर्क कर कंटेनर को रुकवाया। 16 फरवरी 2026 को गुजरात के मुंद्रा पोर्ट स्थित वेयरहाउस में ड्रग्स इंस्पेक्टर, एफएसएल और कस्टम की मौजूदगी में की गई संयुक्त छापेमारी के दौरान 528 किलो से अधिक वजन की लाखों गोलियां बरामद की गईं। इनमें ट्रामाडोल, अल्प्राजोलम, ज़ोलपिडेम और नाइट्राज़ेपम जैसी नशीली दवाएं शामिल हैं।

पकड़े गए आरोपियों का प्रोफाइल बेहद चौंकाने वाला है। गिरोह का मुख्य सदस्य विष्णु दत्त शर्मा MCA डिग्री धारक है और पिछले 8 वर्षों से एक्सपोर्ट का काम कर रहा था। वहीं आरोपी विकास सिंह B.Sc ग्रेजुएट है और ‘क्विक कार्गो’ नामक कोरियर कंपनी चलाता है। जावेद खान कस्टम हाउस एजेंट के रूप में काम करता था, जिसे लॉजिस्टिक्स और कस्टम क्लियरेंस की बारीक जानकारी थी। इन शिक्षित आरोपियों ने अपने वैध व्यापारिक प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर इस अवैध ड्रग सिंडिकेट का जाल बिछाया था।

डीसीपी विक्रम सिंह ने बताया कि इतनी बड़ी मात्रा में साइकोट्रोपिक टैबलेट की जब्ती अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क के लिए एक बड़ा झटका है। पुलिस अब इस साजिश के अन्य पहलुओं और फरार आरोपी नौशाद उर्फ बबलू की तलाश में जुटी है, जिसे घोषित अपराधी बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। क्राइम ब्रांच युवाओं को नशे के चंगुल से बचाने और ऐसे सिंडिकेट को पूरी तरह जड़ से मिटाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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