जेएनयू में खूनी रात: नकाबपोशों का तांडव, छात्रों पर रॉड से हमला और पत्थरबाजी, कई छात्र घायल

नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में रविवार की पूरी रात हिंसा और भारी तनाव के नाम रही। विश्वविद्यालय परिसर एक बार फिर रणक्षेत्र में तब्दील हो गया, जहां दो छात्र गुटों के बीच जमकर संघर्ष हुआ। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने सनसनीखेज आरोप लगाया है कि लगभग 400 नकाबपोश वामपंथी हमलावरों ने सुनियोजित तरीके से स्कूल परिसर को घेरकर छात्रों पर जानलेवा हमला किया। परिषद का दावा है कि हमलावर लोहे की रॉड, पत्थर और धारदार हथियारों से लैस थे। इस हिंसा में कई शोधार्थी गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

अभाविप जेएनयू इकाई के मंत्री प्रवीण पीयूष और पूर्व सहसचिव वैभव मीणा ने साझा बयान में कहा कि यह हमला अभाविप द्वारा छात्रविरोधी ‘सीपो’ मैनुअल के खिलाफ चलाए जा रहे सफल आंदोलन से बौखलाकर किया गया है। आरोप है कि साबरमती टी-प्वाइंट से वीसी गेट तक यात्रा निकाल रहे निष्कासित वामपंथी पदाधिकारियों ने रीडिंग रूम में घुसकर छात्रों को पीटा। अभाविप का दावा है कि जान बचाने के लिए शौचालय में छिपे छात्र प्रतीक भारद्वाज पर हमलावरों ने अग्निशामक यंत्र चला दिया, जिससे कार्बन डाइऑक्साइड के कारण उसका दम घुटने लगा और उसकी हालत गंभीर हो गई। घायलों में प्रतीक, अनिमेष, विजय और मनीष चौधरी शामिल हैं। परिषद ने आरोप लगाया कि इस दौरान पुलिस और प्रशासन मूकदर्शक बने रहे।

दूसरी ओर, जेएनयू प्रशासन ने इस घटना पर सख्त रुख अख्तियार करते हुए अपना पक्ष रखा है। प्रशासन के अनुसार, विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों के एक समूह ने कई एकेडमिक बिल्डिंग्स को कथित तौर पर बंद कर दिया था और सेंट्रल लाइब्रेरी में घुसकर उन छात्रों को डराया-धमकाया जो प्रदर्शन में शामिल होने के लिए तैयार नहीं थे। इसी विवाद ने 22 फरवरी की रात हिंसक झड़प का रूप ले लिया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने और समावेशी शैक्षणिक माहौल को खराब करने की कड़ी निंदा की है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दोषियों के खिलाफ विश्वविद्यालय के नियमों और भारतीय न्याय संहिता के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है। कैंपस में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उपद्रवियों की पहचान की जा रही है ताकि परिसर में शांति और शैक्षणिक मर्यादा बहाल की जा सके।

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