शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य के खिलाफ एफआईआर ; जानें पूरा मामला

राष्ट्रीय जजमेंट

प्रयागराज: ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य प्रत्यक्चैतन्य मुकुंदानंद गिरि के खिलाफ झूंसी थाने में FIR दर्ज की गई. प्रयागराज पॉक्सो कोर्ट के आदेश पर बटुकों से कथित यौन शोषण का केस दर्ज किया गया है. प्रयागराज पुलिस अब इसकी जांच करेगी.ADJ रेप एवं पॉक्सो स्पेशल कोर्ट के जज विनोद कुमार चौरसिया ने पुलिस को निर्देश दिया था कि आरोपों के आधार पर मुकदमा दर्ज कर विधिवत विवेचना की जाए. शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी ने धारा 173(4) के तहत अदालत में अर्जी दाखिल की थी. अर्जी में आरोप लगाया गया कि संबंधित आश्रम में नाबालिग बच्चों के साथ यौन शोषण किया गया.याचिकाकर्ता की ओर से दावा किया गया कि आरोपों से जुड़े साक्ष्य के तौर पर एक CD भी अदालत में पेश की गई है. बताया गया कि 13 फरवरी को आरोप लगाने वाले दोनों नाबालिगों के बयान अदालत में वीडियोग्राफी के साथ दर्ज किए गए.अदालत ने पुलिस की रिपोर्ट को भी संज्ञान में लिया और सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. 21 फरवरी को इस मामले की सुनवाई के बाद पॉक्सो कोर्ट ने FIR दर्ज कर जांच करने का आदेश दिया.प्रयागराज पुलिस करेगी जांच: DCP सिटी मनीष कुमार सांडिल्य ने बताया कि पॉक्सोकोर्ट के आदेश पर झूंसी थाने में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य प्रत्यक्चैतन्य मुकुन्दानंद गिरि के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है. आगे की कानूनी कार्रवाई जांच के निष्कर्ष और विवेचना रिपोर्ट पर निर्भर करेगी.क्या बोले आशुतोष ब्रह्मचारी: कोर्ट में वाद दायर करने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी का कहना है कि उन्हें न्याय मिला है और वह प्रयागराज से वाराणसी तक पदयात्रा निकालकर अपनी बात लोगों के सामने रखने की तैयारी कर रहे हैं. फिलहाल मामला न्यायिक प्रक्रिया में है. आरोपों की सत्यता जांच के बाद ही हो सकेगी.शंकराचार्य बोले- आरोप लगाने वाला हिस्ट्रीशीटर: इस मामले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि उचित है, जब मुकदमा दर्ज होगा, तभी जांच की प्रक्रिया पूरी होगी. न्यायालय लंबा समय न लगाते हुए जल्दी करे. जिस व्यक्ति ने आरोप लगाया है, वह खुद हिस्ट्रीशीटर है. हम योगी आदित्यनाथ नहीं हैं, जो अपना मुकदमा हटवा लेंगे. हमको अपनी न्यायपालिका और सच्चाई पर भरोसा है.अब जानें क्या वाद दायर किया गया: शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी ने धारा 173(4) के तहत प्रयागराज की पॉक्सोकोर्ट में अर्जी दाखिल की थी. इसमें कहा गया कि दो नाबालिग बटुक उनके माघ मेला शिविर में आए. जहां श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के लिए माता शाकुंभरी देवी का अनुष्ठान एवं महायज्ञ चल रहा था. दोनों बटुकों ने अपने साथ हुए ह्दयविदारक, गंभीर और संवेदनशील तथ्यों को उजागर किया है.दोनों ने मुझसे कहा कि आप मुझे अपना शिष्य बनाएं और अपने आप को असुरक्षित बताते हुए मुझसे पुलिस संरक्षण एवं न्यायिक सहायता प्रदान किए जाने का अनुरोध किया. बताया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जो स्वयं को शंकराचार्य बताते हैं, ने और उनके शिष्यों द्वारा गुरुकुल में शिक्षा एवं सेवा के नाम पर उनके साथ कई बार से यौन कुकर्म/दुष्कर्म किया गया. महाकुंभ 2025 के दौरान मेला क्षेत्र में भी दोनों का यौन कृत्य किया गया था. माघ मेला 2026 के दौरान दोनों बालकों के साथ पुनः यौन उत्पीड़न किया गया.रात के समय कथित आरोपी के शिष्य मुकुंदानंद गिरि यह कहकर उन पर दबाव बनाते थे कि यह गुरु-सेवा है. इससे आशीर्वाद मिलेगा. कभी एक-एक कर और कभी दोनों बालकों को साथ सुलाया जाता था. उनके साथ नग्न अवस्था में यौन कुकर्म किया जाता था.बालकों को जबरन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ सोने को कहा जाता है. इसके बाद नंगा करके उनके साथ कुकर्म किया जाता था. माघ मेला में भी शिविर और बाहर खड़ी गाड़ी में भी अविमुक्तेश्वरानंद ने दोनों के साथ बारी-बारी से लैंगिक उत्पीड़न किया.पीड़ित बालकों द्वारा 24 जनवरी 2026 को थाना झूंसी में तहरीर दी गई. 25 जनवरी 2026 को पुलिस आयुक्त प्रयागराज, पुलिस अधीक्षक माघ मेला प्रयागराज को ईमेल द्वारा और 27 जनवरी 2026 को डाक द्वारा पुलिस अधीक्षक माघ मेला प्रयागराज को भेजा गया.
लेकिन कोई अभियोग पंजीकृत नहीं किया गया. आशुतोष महाराज ने यह भी कहा कि प्रशासनिक निष्क्रियता के कारण वादीगण के जीवन पर गंभीर और तात्कालिक खतरा उत्पन्न हो गया है. अतः विवश होकर यह प्रार्थना-पत्र POCSO कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है.शंकराचार्य की छवि धूमिल करने की कोशिश: कोर्ट में सुनवाई के बाद ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्य मुकुंदानंद ने कहा कि जो कानूनी पहलू है, उस पर हमारे अधिवक्ताओं ने कोर्ट में अपनी बात रखी है.

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