प्रशासन की तानाशाही और वामपंथ के पाखंड के बीच पिस रहे छात्र: अभाविप

नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में प्रशासनिक कार्रवाई और छात्र संगठनों के बीच चल रहा गतिरोध गहराता जा रहा है। रविवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) जेएनयू इकाई ने विश्वविद्यालय प्रशासन और वामपंथी छात्र संगठनों पर तीखा हमला बोला। अभाविप ने आरोप लगाया कि जेएनयू वर्तमान में प्रशासन की बेलगाम तानाशाही और वामपंथी छात्रसंघ के पाखंड के बीच पिस रहा है। परिषद के नेताओं ने कहा कि वामपंथी संगठनों का संघर्ष सिद्धांतों पर नहीं बल्कि राजनीतिक स्वार्थ पर आधारित है।

अभाविप जेएनयू के अध्यक्ष मयंक पंचाल ने एक बयान जारी कर कहा कि जब परिषद के कार्यकर्ताओं और सामान्य छात्रों पर एकतरफा कार्रवाई करते हुए भारी जुर्माना और निष्कासन के आदेश दिए गए थे, तब जेएनयूएसयू के प्रतिनिधि पूरी तरह मौन थे। उन्होंने आरोप लगाया कि आज जब उन्हीं के कार्यकर्ताओं पर गाज गिरी है, तो वे हड़ताल और कक्षाओं के बहिष्कार के जरिए सामान्य छात्रों की पढ़ाई बाधित कर रहे हैं। पंचाल ने ‘सीपो’ (CPO) मैनुअल को छात्र विरोधी और दमनकारी बताते हुए इसके तत्काल निरस्तीकरण की मांग दोहराई। उन्होंने दावा किया कि जब यह मैनुअल लागू हुआ था, तब वामपंथी संगठनों ने प्रशासन के साथ साठगांठ कर इसका स्वागत किया था, लेकिन आज वही नियमावली उन पर लागू हुई है तो वे इसे अलोकतांत्रिक बता रहे हैं।

वहीं, अभाविप जेएनयू के मंत्री प्रवीण कुमार पीयूष ने कहा कि परिषद ने प्रारंभ से ही संवादात्मक और लोकतांत्रिक वातावरण की वकालत की है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की तानाशाही के विरुद्ध उनका संघर्ष जारी है, लेकिन वे परिसर में अराजकता फैलाने और कक्षाओं को बाधित करने की राजनीति का कभी समर्थन नहीं करते। अभाविप का स्पष्ट मत है कि जो लोग सत्ता के साथ खड़े होकर दूसरों पर हो रहे अन्याय पर चुप रहे, वे अब नैतिक आधार खो चुके हैं। परिषद ने चेतावनी दी है कि वे छात्रों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर किसी भी प्रकार के आघात को बर्दाश्त नहीं करेंगे और प्रशासन व अवसरवादी राजनीति के विरुद्ध छात्रों की आवाज बनकर खड़े रहेंगे।

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