बदायूं से दिल्ली तक फैला था ‘नशे का जाल’, एंटी-नारकोटिक्स स्क्वाड ने मास्टरमाइंड समेत पांच को दबोचा, 60 लाख की स्मैक जब्त

नई दिल्ली: दिल्ली के पूर्वी जिला पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स स्क्वाड ने नशे के सौदागरों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने एक संगठित अंतरराज्यीय ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए मुख्य सरगना समेत कुल पांच तस्करों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से लगभग 326.85 ग्राम उच्च गुणवत्ता वाली ‘स्मैक’ बरामद की गई है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 60 लाख रुपये है। खास बात यह है कि इस ऑपरेशन में पुलिस ने उन दो स्थानीय तस्करों को भी पकड़ा है, जो पूर्व के मामलों में भगोड़े घोषित होने की प्रक्रिया में थे।

पूर्वी जिले के एडिशनल पुलिस कमिश्नर अभिषेक धनिए ने बताया कि ड्रग पेडलर्स के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत एडिशनल डीसीपी ऑपरेशंस संजय सिंह के मार्गदर्शन और एंटी-नारकोटिक्स स्क्वाड प्रभारी इंस्पेक्टर अरुण कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई थी। इस टीम में एसआई संजीव, एएसआई अरुण, देवेंद्र, हेड कांस्टेबल लाखन, देवेश, अशोक और कांस्टेबल कौशल शामिल थे।

टीम ने सबसे पहले एनएच-24 के पास जाल बिछाकर अमीन खान (24) को गिरफ्तार किया, जिसके पास से 291 ग्राम स्मैक बरामद हुई। अमीन की निशानदेही पर पुलिस टीम ने उत्तर प्रदेश के बदायूं में सघन छापेमारी की और वहां से मुख्य ‘सोर्स’ राशिद और फिर पूरे सिंडिकेट के सरगना बलबीर (34) को धर दबोचा। बलबीर के पास से 35.85 ग्राम अतिरिक्त स्मैक बरामद की गई।

जांच के अगले चरण में जब आरोपी अमीन खान के कॉल डिटेल रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। अमीन के संपर्क में त्रिलोकपुरी के दो शातिर अपराधी, आसिफ (27) और इकरार (42) थे। ये दोनों अमीन से थोक में स्मैक लेकर स्थानीय इलाकों में छोटी पुड़िया बनाकर बेचते थे। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दोनों को गिरफ्तार कर लिया। जांच में पता चला कि आसिफ और इकरार मयूर विहार थाने में दर्ज एनडीपीएस एक्ट के एक पुराने मामले में वांछित थे और उनके खिलाफ भगोड़ा घोषित करने की कार्यवाही चल रही थी।

पूछताछ में पता चला कि आरोपी अमीन खान 2023 में मेरठ जेल से छूटने के बाद गांधी नगर में किराए पर रह रहा था। वह बदायूं से भारी मात्रा में नशा लाकर दिल्ली के खोड़ा चौक और शशि गार्डन जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में खपाता था। गिरोह के सभी सदस्य आर्थिक लाभ के लिए शहरी युवाओं और कमजोर तबके को नशे की लत का शिकार बना रहे थे। पुलिस अब इस सिंडिकेट के अन्य सदस्यों और उनके बैंक खातों की जांच कर रही है।

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