मास्टर-की से उड़ाते थे कारे, गुजरात-राजस्थान बॉर्डर तक फैला था नेटवर्क, लग्जरी गाड़ियाँ समेत तीन गिरफ्तार

नई दिल्ली: दिल्ली के पूर्वी जिला पुलिस की एंटी-ऑटो थेफ्ट स्क्वाड ने वाहन चोरी के खिलाफ एक बड़े अभियान में सफलता हासिल करते हुए एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के तीन शातिर सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जो दिल्ली-एनसीआर से लग्जरी गाड़ियाँ चुराकर उन्हें दूसरे राज्यों में बेचते थे। आरोपियों की निशानदेही पर करीब 55 से 60 लाख रुपये मूल्य की तीन लग्जरी गाड़ियाँ और फर्जी नंबर प्लेट बरामद की गई हैं। इस कार्रवाई से दिल्ली के विभिन्न थानों में दर्ज वाहन चोरी के 5 मामलों को सुलझाने का दावा किया गया है।

पूर्वी जिले के एडिशनल पुलिस कमिश्नर अभिषेक धनिया ने बताया कि वाहन चोरी की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए एएटीएस प्रभारी इंस्पेक्टर पवन यादव के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई थी। इस टीम में सब-इंस्पेक्टर संदीप, एएसआई दीपक त्यागी, अर्जुन, राजीव सोलंकी, विनोद, प्रवीण, अजीत और हेड कांस्टेबल संदीप, अश्वनी व पंकज शामिल थे। टीम ने तकनीकी विश्लेषण और जमीनी सूचनाओं के आधार पर जाल बिछाकर उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर निवासी मशरूर (56), मेरठ निवासी आसिफ (42) और मुजफ्फरनगर निवासी अकील (40) को गिरफ्तार किया।

पूछताछ के दौरान आरोपियों ने खुलासा किया कि वे मास्टर-की का इस्तेमाल कर दिल्ली से हाई-एंड गाड़ियाँ चुराते थे। चोरी के बाद ये गाड़ियाँ मेरठ ले जाई जाती थीं, जहाँ उन पर फर्जी नंबर प्लेट लगाई जाती थी। पुलिस ने आरोपियों की 8 दिन की रिमांड के दौरान गाजियाबाद के कौशांबी और सिद्धार्थ विहार से चोरी की एक किया सेल्टोस और मारुति ब्रेजा बरामद की। इसके अलावा, एक टीम ने गुजरात-राजस्थान बॉर्डर के पास सांचौर में छापेमारी कर चोरी की एक महिंद्रा स्कॉर्पियो क्लासिक भी बरामद की, जिस पर गुजरात की फर्जी नंबर प्लेट लगी थी।

आरोपियों की कार्यशैली काफी शातिर थी। वे निर्दोष खरीदारों को यह कहकर गाड़ियाँ बेचते थे कि ये बैंक द्वारा किस्त न चुकाने के कारण जब्त की गई गाड़ियाँ हैं। जांच में यह भी सामने आया कि वे पुलिस से बचने के लिए मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश से जारी फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल करते थे। पकड़े गए तीनों आरोपी पेशेवर अपराधी हैं; मशरूर पर पहले से 12, आसिफ पर 11 और अकील पर 10 आपराधिक मामले दर्ज हैं। फिलहाल पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है और इनके इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है।

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