दुबई से संचालित हो रहा था ठगी का काला साम्राज्य, क्राइम ब्रांच ने किया भंडाफोड़, मास्टरमाइंड का गुर्गा गिरफ्तार

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने शेयर बाजार में निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक सुनियोजित अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस की इंटर स्टेट सेल ने इस गिरोह के एक फरार आरोपी, रोनक जगदीश भाई ठक्कर को गोवा के मोपा एयरपोर्ट से उस समय गिरफ्तार किया, जब वह विदेश से लौट रहा था। यह पूरी कार्रवाई एसीपी रमेश चंद्र लांबा की देखरेख में गठित एक विशेष टीम द्वारा अंजाम दी गई।

इस पूरे गोरखधंधे का खुलासा राजस्थान के हनुमानगढ़ निवासी एक व्यक्ति की शिकायत के बाद हुआ। पीड़ित ने बताया कि उसे “A002 Globe Capital Stocks Group” नामक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़कर “M/s Globe Capital Market Limited” का प्रतिनिधि बनकर ठगा गया। उसे भारी मुनाफे का लालच देकर एक फर्जी मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से ₹61.72 लाख का निवेश कराया गया। जब उसने रकम निकालने की कोशिश की और वह विफल रहा, तब उसे अहसास हुआ कि वह धोखाधड़ी का शिकार हो चुका है। इसके बाद क्राइम ब्रांच ने भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया।

जांच के दौरान पुलिस ने पैसों के लेन-देन का पीछा किया, जिससे पता चला कि ठगी गई रकम मुख्य रूप से जूनागढ़ की ‘महादेव एंटरप्राइजेज’ और श्रीनगर की ‘न्यू सादीकिन’ नामक शेल कंपनियों के बैंक खातों में जमा की गई थी। इसके बाद फंड को तेजी से महाराष्ट्र और गुजरात के अन्य ‘म्यूल’ खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। इस सिंडिकेट ने खातों के प्रबंधन के लिए एक्सिस बैंक के एक कर्मचारी प्रशांत योगानंदी की भी मदद ली थी, जिसने ₹1.5 लाख के बदले फर्जी दस्तावेजों पर खाते खुलवाए थे।

क्राइम ब्रांच ने गिरोह के ‘मोडस ऑपरेंडी’ का खुलासा करते हुए बताया कि पीड़ितों को व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर ‘वीआईपी स्टॉक टिप्स’ का झांसा दिया जाता था। ग्रुप में फर्जी सदस्य बनकर सिंडिकेट के लोग झूठी सफलता की कहानियां साझा करते थे और फिर पीड़ितों को फर्जी ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड कराया जाता था। जांच में सामने आया कि अहमदाबाद के एक वेंडर दीपक वाधवानी ने जाली दस्तावेजों पर 31 से अधिक सिम कार्ड उपलब्ध कराए थे। ठगी गई राशि को अंततः क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर या हवाला के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ठिकाने लगाया जाता था।

गिरफ्तार आरोपी रोनक ठक्कर दुबई में रहकर ऑपरेशन्स संभाल रहा था। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह मुख्य मास्टरमाइंड क्रिश हसमुख भाई शाह के निर्देश पर काम करता था। रोनक का काम भारत में ‘म्यूल’ बैंक खातों का इंतजाम करना था, जिसके बदले उसे 5% कमीशन मिलता था। उसका भाई नीलेश ठक्कर भारत में फंड की निकासी और बैंक किट्स के समन्वय का काम देखता था।

पुलिस ने इस मामले में अब तक कुल 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से 81 सिम कार्ड, 24 मोबाइल फोन, फर्जी रबर स्टैम्प, जाली MSME दस्तावेज और चेक बुक बरामद किए गए हैं। मुख्य मास्टरमाइंड क्रिश हसमुख भाई शाह को पहले ही घोषित अपराधी घोषित किया जा चुका है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

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