ड्रग तस्करों की काली कमाई पर दिल्ली पुलिस का बड़ा प्रहार: ₹68 लाख से अधिक की अवैध संपत्ति फ्रीज

नई दिल्ली: भारत सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत दिल्ली पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने ड्रग तस्करों के खिलाफ एक बड़ी वित्तीय कार्रवाई को अंजाम दिया है। पुलिस ने नशीले पदार्थों की तस्करी से अर्जित की गई ₹68 लाख से अधिक की अवैध संपत्ति की पहचान कर उन्हें एनडीपीएस अधिनियम के कड़े प्रावधानों के तहत फ्रीज कर दिया है। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य ड्रग सिंडिकेट्स की आर्थिक रीढ़ को पूरी तरह से तोड़ना है।

 हेरोइन तस्करी से बना बैंक बैलेंस और कार जब्त

क्राइम ब्रांच के थाना एएनटीएफ ने मंगोलपुरी और पीरागढ़ी इलाके के सक्रिय तस्करों दीपक लांगी, विक्रम उर्फ बंटी और तुषार को गिरफ्तार कर उनके पास से 320 ग्राम हेरोइन बरामद की थी। वित्तीय जांच के दौरान पता चला कि इन आरोपियों ने नशे के पैसे से संपत्ति अर्जित की है। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए ₹7.60 लाख की संपत्ति फ्रीज की, जिसमें एक इकोस्पोर्ट कार, एक टीवीएस जुपिटर स्कूटी और कोटक महिंद्रा बैंक में जमा ₹1 लाख का बैलेंस शामिल है।

नरेला की दुकानों और नकदी पर चला पुलिस का डंडा

एक अन्य बड़े मामले में, क्राइम ब्रांच ने विकास, सुनील भारद्वाज और अजीत कुमार सहित 6 आरोपियों को भारी मात्रा में नशीली दवाओं (कैप्सूल और टैबलेट) के साथ गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया कि इन तस्करों ने नरेला स्थित अग्रवाल शॉपिंग प्लाजा में दो दुकानें (G-32 और G-33) खरीदी थीं, जिनकी कीमत ₹58.14 लाख आंकी गई है। इसके अलावा, ₹70 हजार की मोटरसाइकिल और आरोपियों के पास से मिले ₹1.85 लाख कैश को भी फ्रीज कर दिया गया है। इस मामले में कुल ₹60.69 लाख की संपत्ति जब्त की गई है।

डीसीपी एएनटीएफ (क्राइम) संजीव कुमार यादव ने बताया कि दिल्ली पुलिस न केवल तस्करों को सलाखों के पीछे भेज रही है, बल्कि उनके द्वारा अवैध रूप से बनाई गई संपत्तियों को भी निशाना बना रही है। सक्षम प्राधिकारी ने 14 जनवरी को इन संपत्तियों को फ्रीज करने के आदेशों की पुष्टि कर दी है। दिल्ली पुलिस का संकल्प है कि अपराध से होने वाली कमाई को पूरी तरह से समाप्त कर ‘नशा मुक्त दिल्ली’ के सपने को साकार किया जाए।

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