कूड़ा फैलाना और दीवारों पर थूकना देशभक्ति नहीं, स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल हो नागरिक शिष्टाचार: स्वाति मालीवाल

नई दिल्ली: राज्यसभा के शून्यकाल में शुक्रवार को नागरिक अनुशासन और ‘सिविक सेंस’ (नागरिक बोध) का मुद्दा प्रमुखता से उठा। सांसद स्वाति मालीवाल ने देश के प्रमुख शहरों की बदहाली और नागरिकों की जिम्मेदारी पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने मांग की कि केवल ऊंची इमारतों से कोई राष्ट्र विकसित नहीं होता, बल्कि साफ सड़कें और अनुशासित नागरिक इसकी असली पहचान हैं। उन्होंने ‘सिविक सेंस’ को स्कूल और कॉलेजों के पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा बनाने की सरकार से पुरजोर सिफारिश की।

सदन को संबोधित करते हुए मालीवाल ने कहा कि आज हमारे शहरों की हालत चिंताजनक है। सड़कों पर कूड़ा, फुटपाथों पर अतिक्रमण और बंद पड़े शौचालय आम बात हो गए हैं। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि सरकारों और नगर निगमों की जवाबदेही तो है ही, लेकिन नागरिक भी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकते। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अक्सर देखा जाता है कि लोग महंगी गाड़ियों से भी कूड़ा सड़क पर फेंक देते हैं, जो दर्शाता है कि उच्च शिक्षा और आर्थिक समृद्धि नागरिक बोध की गारंटी नहीं है।

स्वाति मालीवाल ने स्वच्छता के मामले में जापान की संस्कृति का जिक्र किया, जहां बच्चे अपना क्लासरूम स्वयं साफ करते हैं। साथ ही उन्होंने भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों की अनुशासन और स्वच्छता की संस्कृति की भी जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक धरोहरों और विश्व प्रसिद्ध खानपान के बावजूद भारत में विदेशी पर्यटकों की संख्या पेरिस और वियतनाम जैसे देशों से कम है, क्योंकि गंदगी और अव्यवस्था के वायरल वीडियो देश की छवि को वैश्विक स्तर पर नुकसान पहुंचाते हैं।

सांसद ने राजनीतिक पोस्टरों और बैनरों से शहरों की दीवारों को बदरंग करने की प्रवृत्ति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब नियम बनाने वाले ही सार्वजनिक स्थलों को खराब करेंगे, तो आम नागरिक उनसे क्या सीखेंगे? उन्होंने सुझाव दिया कि नियम तोड़ने वालों पर सख्ती से जुर्माना लगाया जाए और नगर निकायों के बजट व जवाबदेही को मजबूत किया जाए। अंत में उन्होंने भावुक अपील करते हुए कहा कि अपने देश को साफ रखना ही सच्ची देशभक्ति है।

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