दिल्ली के सागरपुर थाने में रेप पीड़िता से बदसलूकी और वकीलों को धमकी, SHO लाइन हाजिर और महिला SI निलंबित

नई दिल्ली: दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम जिले के सागरपुर थाने से मानवता और कानून को ताक पर रखने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। एक तरफ जहां दिल्ली पुलिस महिला सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं सागरपुर थाने के अधिकारियों पर एक बलात्कार पीड़िता को न्याय देने के बजाय उसे डराने, धमकाने और उसके वकील के साथ अभद्रता करने का गंभीर आरोप लगा है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया, जिसके बाद आनन-फानन में डीसीपी ने एसएचओ को लाइन हाजिर और एक महिला सब-इन्स्पेक्टर को निलंबित कर दिया है।

जानकारी के अनुसार, पीड़िता अपने साथ हुए दुष्कर्म की शिकायत दर्ज कराने सागरपुर थाने पहुंची थी। आरोप है कि वहां मौजूद एसएचओ और अन्य पुलिसकर्मियों ने सहानुभूति दिखाने के बजाय पीड़िता पर ही चिल्लाना शुरू कर दिया। वायरल वीडियो में पुलिसकर्मी पीड़िता को “चुप रहो” और “झूठ बोल रही हो” कहकर प्रताड़ित करते दिख रहे हैं। हद तो तब हो गई जब पीड़िता को उसके कानूनी अधिकार से वंचित करते हुए वकील से मिलने तक नहीं दिया गया। वीडियो में पुलिस अधिकारी वकीलों के लिए भी बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते और उन्हें थाने में न घुसने देने की धमकी देते सुने जा रहे हैं।

इस घटनाक्रम के बाद दिल्ली के वकील समुदाय में भारी रोष व्याप्त है। ‘को-ऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ ऑल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट बार एसोसिएशन’ ने इसे पूरी कानूनी बिरादरी का अपमान बताया है। वकीलों का कहना है कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और पीड़ित को वकील तक न करने दिया जाए, तो आम आदमी न्याय की उम्मीद किससे करे? शुक्रवार को बड़ी संख्या में वकीलों ने सागरपुर थाने का घेराव किया और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। वकीलों की मांग है कि दोषी पुलिसकर्मियों पर केवल विभागीय कार्रवाई न होकर आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए।

मामले की गंभीरता और बढ़ते जन-आक्रोश को देखते हुए दक्षिण-पश्चिम जिले के डीसीपी अमित गोयल ने कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए हैं। सागरपुर एसएचओ को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया है, जबकि एक महिला एसआई को ड्यूटी में लापरवाही और दुर्व्यवहार के लिए निलंबित कर दिया गया है। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विजिलेंस यूनिट को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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