साइबर ठगों पर पुलिस का ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: एक महीने में 55 अपराधी गिरफ्तार, 1.55 करोड़ रुपये फ्रीज, 450 सिम बरामद

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के वेस्ट जिला की साइबर पुलिस ने तकनीक और फील्ड इंटेलिजेंस के तालमेल से देश के सबसे बड़े साइबर ठगी सिंडिकेट्स में से एक का भंडाफोड़ किया है। जनवरी 2026 के पूरे महीने चले इस विशेष अभियान के तहत पुलिस ने देश के 8 राज्यों में ताबड़तोड़ छापेमारी कर 55 शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह अब तक मासूम नागरिकों से 4.84 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी कर चुका है।

डिजिटल अरेस्ट: जनकपुरी के बुजुर्ग से 15 लाख की ठगी ने खोले राज

इस बड़ी कार्रवाई की शुरुआत जनकपुरी के एक सेवानिवृत्त केंद्र सरकार के कर्मचारी के साथ हुई ठगी से हुई। ठगों ने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर बुजुर्ग को ‘डिजिटल अरेस्ट’ किया और डरा-धमकार 15 लाख रुपये ऐंठ लिए। जब एसएचओ विकास कुमार बुलडक के नेतृत्व में टीम ने जांच शुरू की, तो तार उत्तर प्रदेश के गोंडा से जुड़े मिले।

वहां से पुलिस ने अनुज कुमार पांडेय, आशीष दुबे और राजन यादव को गिरफ्तार किया। चौंकाने वाली बात यह है कि आशीष और राजन जियो स्टोर के मैनेजर और असिस्टेंट मैनेजर के पद पर तैनात थे। ये आरोपी अवैध रूप से सिम कार्ड एक्टिवेट कर उन्हें ई-सिम में बदलते थे और टेलीग्राम के माध्यम से उनके क्यूआर कोड चीनी हैंडलर्स को भेजते थे, जिनका इस्तेमाल भारत में लोगों को डराने-धमकाने वाले कॉल करने के लिए किया जाता था।

म्यूल अकाउंट्स और होटलों से चलता था ‘ठगी का कंट्रोल रूम’

जांच में एक और डरावना सच सामने आया। ठगों ने उत्तर प्रदेश के संभल और नोएडा में अपना जाल फैला रखा था। आरोपी उत्कर्ष वार्ष्णेय, कबीर और विशाल गोस्वामी एजेंटों के जरिए गरीब लोगों के नाम पर बैंक खाते (म्यूल अकाउंट्स) खुलवाते थे। इन खाताधारकों को होटलों में ठहराया जाता था और उनके मोबाइल व पासबुक ठग अपने पास रखते थे ताकि रियल-टाइम में ट्रांजैक्शन कर सकें। पुलिस ने इनके पास से 1.95 लाख नकद और भारी मात्रा में एटीएम कार्ड बरामद किए हैं।

क्रिप्टोकरेंसी के जरिए ‘मनी रोटेशन’

ठगी की रकम को ट्रैक करना मुश्किल बनाने के लिए यह गिरोह USDT (एक प्रकार की क्रिप्टोकरेंसी) का सहारा ले रहा था। मध्य प्रदेश के रतलाम और इंदौर में मारे गए छापे में शादाब खान और भाग्येश जैसे आरोपियों को पकड़ा गया, जो ठगी के पैसे को क्रिप्टो में बदलकर रोटेट करते थे। पुलिस ने इनके पास से एक डायरी बरामद की है, जिसमें करोड़ों के लेन-देन का कच्चा चिट्ठा मौजूद है।

पुलिस की बड़ी रिकवरी और वित्तीय राहत

वेस्ट जिले के डीसीपी दराडे शरद भास्कर ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य केवल आरोपियों को पकड़ना ही नहीं, बल्कि पीड़ितों का पैसा वापस दिलाना भी था। टीम ने 1,55,75,988 रुपये बैंकों में होल्ड कराए है। 39 लाख रुपये कोर्ट के माध्यम से पीड़ितों को लौटाए गए। 125 से ज्यादा मोबाइल, 450+ सिम कार्ड, 50+ एटीएम कार्ड और एक लग्जरी कार बरामद की है।

इन राज्यों में फैला था नेटवर्क:

दिल्ली पुलिस की टीमों ने तमिलनाडु, महाराष्ट्र, झारखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और दिल्ली की खाक छानी। इस दौरान कुल 20 बड़े मामलों को सुलझाया गया और 13 पुराने केसों का निपटारा किया गया।

सावधानी ही बचाव है

डीसीपी वेस्ट ने जनता से अपील की है कि कोई भी सरकारी विभाग फोन पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करता। यदि कोई निवेश पर दोगुने रिटर्न का लालच दे या अज्ञात लिंक पर क्लिक करने को कहे, तो सावधान रहें। किसी भी साइबर फ्रॉड की स्थिति में तुरंत 1930 पर कॉल करें या ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराएं।

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