दवाइयों पर 1100% तक मुनाफाखोरी और डॉक्टरों के विदेशी दौरों पर संसद में गरजीं स्वाति मालीवाल, स्वास्थ्य मंत्री से मांगे कड़े जवाब

नई दिल्ली: दिल्ली की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने संसद में फार्मा कंपनियों की मनमानी और दवाइयों की कीमतों में भारी मुनाफाखोरी का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने संसद की स्थायी समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए खुलासा किया कि फार्मा कंपनियां कुछ दवाइयों पर 600% से लेकर 1100% तक का मुनाफा कमा रही हैं, जिससे आम आदमी की कमर टूट रही है।

सांसद स्वाति मालीवाल ने सदन में उदाहरण देते हुए बताया कि एलर्जी की आम दवा ‘सिट्रीज़ीन’ जिसकी स्टॉकिस्ट कीमत मात्र ₹1.52 है, उसे ₹21.06 में बेचा जा रहा है। इसी तरह पेन किलर ‘इबुप्रोफेन’ की एमआरपी स्टॉकिस्ट कीमत से कई गुना अधिक ₹4560 रखी गई है। उन्होंने इंसुलिन और कैंसर जैसी जीवन रक्षक दवाओं की कीमतों में भारी अंतर पर सवाल उठाते हुए स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा से पूछा कि क्या सरकार इस मुनाफाखोरी को रोकने के लिए कोई मजबूत रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार करेगी?

जवाब में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने कहा कि दवाइयों की मूल्य निर्धारण नीति एक निरंतर और पारदर्शी प्रक्रिया है। विभाग और राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण समय-समय पर फिक्की, सीआईआई और विभिन्न मरीज समूहों के साथ परामर्श करते हैं ताकि नीति को प्रासंगिक बनाया जा सके।

सांसद मालीवाल ने एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि 2024 के स्पेशल ऑडिट में सामने आया है कि एक फार्मा कंपनी ने ₹2 करोड़ खर्च कर 30 डॉक्टरों को पेरिस की यात्रा कराई। उन्होंने सवाल किया कि क्या फार्मा कंपनियों द्वारा डॉक्टरों को दिए जाने वाले इन ‘इंसेंटिव्स’ और ‘विदेशी दौरों’ पर रोक लगाने के लिए सरकार कोई सख्त कानून लाएगी?

इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि डॉक्टरों का आचरण इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के कोड ऑफ कंडक्ट के दायरे में आता है। उन्होंने कहा कि आईएमए ऐसे मामलों में दोषी डॉक्टरों के लाइसेंस रद्द करने जैसी कार्रवाई करता है।

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