निजी अस्पतालों की मनमानी पर संसद में गरजीं स्वाति मालीवाल, देशभर में ‘क्लिनीकल एस्टाब्लिशमेंट एक्ट’ लागू करने की मांग

नई दिल्ली: राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने संसद में निजी अस्पतालों और स्वास्थ्य बीमा कंपनियों द्वारा आम जनता के शोषण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि आज इन अस्पतालों में इलाज कम और “बिलिंग” का खेल ज्यादा चल रहा है। सांसद ने सरकार से मांग की है कि देशभर में ‘क्लिनीकल एस्टाब्लिशमेंट एक्ट’ को अनिवार्य रूप से लागू किया जाए ताकि चिकित्सा सेवाओं की दरें तय हो सकें।

संसद परिसर में बोलते हुए स्वाति मालीवाल ने कहा कि आपात स्थिति में जब कोई मरीज अस्पताल पहुँचता है, तो डॉक्टर पहले उसकी जान बचाने के बजाय बीमा और पैसों के बारे में सवाल करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पतालों के कमरों का किराया फाइव स्टार होटलों से भी ज्यादा वसूला जा रहा है और थर्मामीटर, दस्ताने व सैनिटाइज़र जैसी बुनियादी चीज़ों के भी भारी-भरकम बिल बनाए जाते हैं। उनके अनुसार, मरीजों को जानबूझकर महंगी ब्रांडेड दवाइयां और गैर-जरूरी टेस्ट लिखे जाते हैं।

सांसद ने बीमा कंपनियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कंपनियां प्रीमियम तो बढ़ा देती हैं, लेकिन क्लेम के समय छोटी-छोटी शर्तों का हवाला देकर उसे खारिज कर देती हैं, जिससे लाखों परिवार कर्ज के जाल में फंस रहे हैं। उन्होंने सदन को याद दिलाया कि 2010 में ‘Clinical Establishments Act’ पारित हुआ था, लेकिन अब तक केवल 12 राज्यों ने इसे अपनाया है। हैरानी की बात यह है कि देश की राजधानी दिल्ली ने भी इसे अभी तक लागू नहीं किया है।

स्वाति मालीवाल ने केंद्र सरकार से मांग की है कि “पहले इलाज, बाद में बिल” की व्यवस्था को कानूनी जामा पहनाया जाए। उन्होंने अस्पतालों में पारदर्शी बिलिंग व्यवस्था सुनिश्चित करने और बीमा प्रीमियम की बढ़ोत्तरी पर सख्त निगरानी रखने की भी पुरजोर वकालत की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि निजी अस्पतालों में मरीज को राजस्व का साधन नहीं, बल्कि इंसान समझा जाए।

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