‘मरे हुए गवाहों’ और फर्जी दस्तावेजों के सहारे प्रॉपर्टी हड़प रहा था गिरोह, पुलिस ने किया भंडाफोड़

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (साउथर्न रेंज) ने पॉश इलाके ग्रेटर कैलाश-1 में बेशकीमती आवासीय संपत्तियों को हड़पने वाले एक संगठित भू-माफिया गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह फर्जी दस्तावेज तैयार कर और सोची-समझी साजिश के तहत अदालती कार्यवाही का सहारा लेकर बुजुर्गों की कोठियों पर कब्जा करने का प्रयास कर रहा था। पुलिस ने इस मामले में एक प्रैक्टिसिंग वकील सहित तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

डीसीपी क्राइम ब्रांच आदित्य गौतम के अनुसार, इस पूरे मामले की शुरुआत ग्रेटर कैलाश निवासी एक व्यक्ति की शिकायत से हुई। शिकायतकर्ता को एक रिश्तेदार के माध्यम से पता चला कि विनीत सहगल नामक व्यक्ति ने एक राष्ट्रीय दैनिक समाचार पत्र में उनकी पैतृक संपत्ति को लेकर एक फर्जी सार्वजनिक नोटिस प्रकाशित करवाया है, जिसमें संपत्ति पर अपना मालिकाना हक होने का झूठा दावा किया गया है। प्राथमिक जांच में सामने आया कि शिकायतकर्ता का परिवार दशकों से उस संपत्ति पर कानूनी रूप से काबिज है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर विजय पाल दहिया को सौंपी गई।

जांच में गिरोह के काम करने के बेहद शातिर और पेशेवर तरीके का खुलासा हुआ है। यह गिरोह मुख्य रूप से उन संपत्तियों को ‘सॉफ्ट टारगेट’ बनाता था जिनके मालिक बुजुर्ग हैं। मालिकाना हक जताने के लिए आरोपी फर्जी वसीयत, सेल डीड और रिलीज डीड जैसे जाली दस्तावेज तैयार करते थे। अपनी धोखाधड़ी को कानूनी वैधता देने के लिए ये लोग अलग-अलग अदालतों में सिविल सूट दाखिल करते थे। चौंकाने वाली बात यह है कि इन अदालती कार्यवाहियों में ऐसे ‘फर्जी गवाहों’ को पेश किया जाता था जो या तो मर चुके थे या जिनके पते पूरी तरह फर्जी थे।

एसीपी वी.के.पी.एस. यादव के पर्यवेक्षण में गठित विशेष टीम ने 22 जनवरी 2026 को तीन आरोपियों—आशीष चौधरी, विनीत कुमार सहगल और दिलीप कुमार पांडेय को गिरफ्तार किया। इनमें से आशीष चौधरी एक वकील है, जबकि दिलीप पांडेय का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। पुलिस ने आरोपियों की कस्टडी के दौरान जालसाजी से जुड़े कई मूल आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए हैं। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने दिल्ली के किन अन्य इलाकों में बुजुर्गों की संपत्तियों को इसी तरह निशाना बनाया है।

Comments are closed.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More