आस्था, आरती और जिम्मेदारी का अद्भुत समन्वय बना नर्मदा जयंती आयोजन

संगम जल पूजन के साथ स्वच्छता, पर्यावरण एवं जल संरक्षण का दिया गया सशक्त संदेश

नदियों की पूजन का अर्थ संरक्षण – डा जितेन्द्र कुमार तिवारी

राष्ट्रीय जजमेंट

झांसी। माघ माह के पावन पर्व पर जिला जनकल्याण महासमिति झांसी एवं रानी झांसी फाऊंडेशन झांसी के तत्वावधान में रविवार को मां नर्मदा जयंती के अवसर पर श्री सिद्धेश्वर सिद्ध पीठ, ग्वालियर रोड झांसी पर संगम जल पूजन समारोह एवं गंगा, यमुना, सरस्वती और मां नर्मदा के दिव्य स्वरूपों की भव्य महाआरती श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक चेतना के साथ संपन्न हुई।
कार्यक्रम आचार्य पं. हरिओम पाठक जी के मुख्य आतिथ्य में तथा डा. जितेन्द्र कुमार तिवारी के संयोजन में आयोजित किया गया। इस अवसर पर चार कन्याओं ने गंगा, यमुना, सरस्वती एवं मां नर्मदा के प्रतीकात्मक स्वरूप धारण कर मंच पर विराजमान होकर पवित्र जल से भरे कलश की विधिवत पूजा-अर्चना एवं सामूहिक आरती संपन्न कराई। आरती के दौरान पूरा परिसर मंत्रोच्चार, शंखनाद और “हर-हर नर्मदे” के जयकारों से गूंज उठा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डा. जितेन्द्र कुमार तिवारी ने कहा कि सनातन धर्म में नदियों, प्रकृति और पंचतत्वों की पूजा का मूल उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मानव को प्रकृति के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार बनाना है। उन्होंने कहा कि नदियों को मां का दर्जा इसलिए दिया गया है ताकि हम उनके जल को दूषित न करें, पूजन सामग्री या अन्य कोई वस्तु प्रवाहित न करें और उन्हें स्वच्छ, निर्मल एवं अविरल बनाए रखने का संकल्प लें।
डा. तिवारी ने अपने वक्तव्य में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण एवं कचरा प्रबंधन को एक-दूसरे से अभिन्न रूप से जुड़ा बताते हुए कहा कि जब तक समाज इन चारों विषयों को अपनी जीवनशैली में नहीं अपनाएगा, तब तक नदियों और प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण संभव नहीं है। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से भावनात्मक निवेदन किया कि आइए, हम सब मिलकर अपनी आस्था को जिम्मेदारी से जोड़ें और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ जल, स्वच्छ पर्यावरण और सुरक्षित प्राकृतिक संसाधन छोड़ें। मुख्य अतिथि आचार्य पं. हरिओम पाठक जी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि सनातन संस्कृति में नदियों की पूजा हमें संयम, मर्यादा और संरक्षण का मार्ग दिखाती है। उन्होंने ऐसे आयोजनों को सामाजिक चेतना जागृत करने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम में मातृशक्ति, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, पर्यावरण प्रेमी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। महाआरती के उपरांत पर्यावरण संतुलन, जनकल्याण एवं प्राकृतिक जल स्रोतों की रक्षा की भावना के साथ कार्यक्रम का समापन प्रसाद वितरण के साथ किया गया।स्वरुपों में कन्याओं के नाम, अनन्या शर्मा, विंध्यवासिनी ओझा, पुष्पांजलि ओझा,स्वेता सिंह,रही
कार्यक्रम में मुख्य रूप से आचार्य राजीव पाठक, सतेंद्र कुमार तिवारी, अरुण पटैरिया,राम नारायण शर्मा, महेश चंद्र गौतम , प्रतिमा ओझा, प्रतिभा शर्मा,पूजा गुप्ता, मोतीलाल दुबे,आर एन उपाध्याय, नम्रता गर्ग, रचना शर्मा, अर्चना गुप्ता,पुष्पा अग्रवाल, अशोक बिलगैंया, शिरोमणि शर्मा, नीता सिंह, चेतन्य ओझा,सुधा साहू, सांवली सिंह, बृजेंद्र पांडेय,भावना चंदेल, सौरव जेजुरकर, अराधना जेजुरकर, बी पी नायक, निधि वर्मा, वंदना,रचना अहिरवार, बबीता ओझा,प्रियंका शर्मा, एम पी द्विवेदी, दीपेंद्र सिंह, उमेश द्विवेदी भार्गव, सूर्या निषाद, मोहिनी राजपूत,किरन राजपूत,प्रभा नामदेव, रचना अहिरवार, पंकज झा,डा मनीष मिश्रा, सुनीता सिंह,हनी सीरोठिया,पूजा उपाध्याय, कीर्ति गुप्ता,राजू पाठक, मयंक श्रीवास्तव , संजय दुबे आदि मौजूद रहे

Comments are closed.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More