बाघों का साया और 1 डिग्री तापमान: पीलीभीत के जंगलों से दिल्ली पुलिस ने खींच निकाला 3 साल से फरार रहा अपराधी

रिटायर्ड फौजी को ठगने वाले गिरोह का 'भंडाफोड़'; 70 दिन जेल में रहे पीड़ित को दिल्ली पुलिस ने दिलाया न्याय

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस के द्वारका जिला अंतर्गत सेक्टर-10 चौकी की टीम ने एक पूर्व सैनिक के साथ हुई धोखाधड़ी का हिसाब चुकता करते हुए एक बेहद शातिर अंतरराज्यीय वाहन ठग गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस टीम ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए करीब 1200 किलोमीटर का पीछा किया और यूपी के पीलीभीत टाइगर रिजर्व के उन दुर्गम इलाकों से मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया, जहां बाघों का आतंक और कड़ाके की ठंड (1°C) पुलिस के लिए बड़ी चुनौती थी।

द्वारका जिले के डीसीपी अंकित सिंह ने बताया कि यह मामला सेवानिवृत्त फौजी संजीव कुमार की शिकायत पर दर्ज किया गया था। संजीव कुमार पुरानी कारों की खरीद-बिक्री का काम करते थे। फरवरी 2023 में हरदीप सिंह रंधावा और उसके एक साथी (जिसकी पहचान बाद में सतेंद्र पाल सिंह के रूप में हुई) ने उन्हें धोखे में रखकर एक ‘इनोवा क्रिस्टा’ कार 14.50 लाख रुपये में बेची। आरोपियों ने जाली बैंक एनओसी और आरटीओ की वेबसाइट पर फर्जी तरीके से लोन क्लियर दिखाकर यह भरोसा दिलाया कि गाड़ी कर्ज मुक्त है। बाद में जब संजीव ने वह गाड़ी पंजाब के एक ग्राहक को बेची, तो खुलासा हुआ कि गाड़ी पर असली मालिक असलम खान का बैंक लोन बकाया था। इस धोखाधड़ी के कारण पीड़ित पूर्व सैनिक और उनके बुजुर्ग पिता को 70 दिनों तक जेल की सजा काटनी पड़ीं।

चौकी इंचार्ज (सेक्टर-10) एसआई रजत मलिक के नेतृत्व में गठित टीम ने जब मामले की जांच शुरू की, तो पता चला कि आरोपियों ने असलम खान नामक व्यक्ति के आधार कार्ड के साथ छेड़छाड़ कर फर्जी आईडी बनाई थी। इस गिरोह का जाल पंजाब के अमृतसर से लेकर उत्तर प्रदेश के पीलीभीत और बरेली तक फैला हुआ था। मुख्य आरोपी हरदीप सिंह रंधावा गिरफ्तारी से बचने के लिए पीलीभीत टाइगर रिजर्व के पास जंगलों और खेतों में छिपकर रह रहा था।

पुलिस टीम ने दिसंबर 2025 के आखिरी हफ्ते से लगातार बरेली, पूरनपुर और पीलीभीत में छापेमारी की। आखिरकार, 4 जनवरी की तड़के करीब 03:45 बजे, खुफिया जानकारी के आधार पर पुलिस ने पीलीभीत के ग्राम भोपतपुर स्थित एक फार्म हाउस की घेराबंदी की। बिना मोबाइल नेटवर्क वाले इस जंगली इलाके में पुलिस ने रात के अंधेरे में ऑपरेशन चलाकर हरदीप सिंह रंधावा को दबोच लिया। आरोपी पिछले 3 सालों से यूपी पुलिस की फाइल में भी वांछित था।

पूछताछ में हरदीप ने खुलासा किया कि इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड सतेंद्र पाल सिंह है। सतेंद्र के आरटीओ कार्यालय और फाइनेंस एजेंटों के साथ गहरे संबंध थे। वे मिलकर फाइनेंस की गई गाड़ियों के फर्जी दस्तावेज तैयार करते और लोन चुकाए बिना ही उन्हें बाजार में ऊंचे दामों पर बेच देते थे। गिरफ्तार आरोपी हरदीप पर पहले से ही हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट जैसे 4 संगीन मुकदमे दर्ज हैं। फिलहाल पुलिस मुख्य आरोपी सतेंद्र पाल सिंह की तलाश में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में छापेमारी कर रही है, जो फिलहाल फरार चल रहा है।

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