देश का सबसे बड़ा ‘डिजिटल अरेस्ट’ ठगी गिरोह बेनकाब; 15 करोड़ की लूट करने वाले सिंडिकेट के 8 गुर्गे 3 राज्यों से गिरफ्तार

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल यूनिट ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर देश भर में खौफ पैदा कर करोड़ों रुपये डकारने वाले एक बेहद खतरनाक अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। कंबोडिया और नेपाल से संचालित होने वाले इस गिरोह ने दिल्ली की एक 77 वर्षीय बुजुर्ग महिला को धमकाकर करीब 14.84 करोड़ रुपये हड़प लिए थे। पुलिस ने एक बड़े ऑपरेशन के तहत गुजरात (वडोदरा), उत्तर प्रदेश (वाराणसी, प्रयागराज, लखनऊ) और ओडिशा (भुवनेश्वर) में छापेमारी कर सिंडिकेट के 8 मुख्य गुर्गों को गिरफ्तार किया है।

स्पेशल सेल के डीसीपी विनीत कुमार ने बताया कि इस गिरोह ने ठगी की सारी हदें पार कर दी थीं। पीड़ित बुजुर्ग महिला को बीती 24 दिसंबर को एक कॉल आया, जिसमें कहा गया कि उनके नाम पर जारी सिम कार्ड मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल है। इसके बाद जालसाजों ने व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए फर्जी ‘सीबीआई’ और ‘पुलिस’ अधिकारी बनकर उन्हें डराया। हद तो तब हो गई जब बदमाशों ने व्हाट्सएप पर ही फर्जी ‘अदालत’ लगाई और महिला व उनके पति को चौबीसों घंटे वीडियो सर्विलांस पर रखा। उन्हें धमकी दी गई कि यदि उन्होंने किसी को बताया तो उन्हें जान से मार दिया जाएगा। डर के मारे पीड़िता ने अपनी जीवन भर की जमा-पूंजी, एफडी और शेयर बेचकर कुल 14,84,26,954 रुपये बदमाशों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीपी प्रेम चंद्र खंडूरी के पर्यवेक्षण और एसआई राज किरण व एसआई अतुल यादव के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई। टीम ने डिजिटल पदचिह्नों का पीछा किया और पाया कि ठगी की रकम देश के अलग-अलग राज्यों के ‘म्यूल बैंक अकाउंट्स’ में भेजी गई है। सबसे पहले वडोदरा से पटेल दिव्यांग और शितोले कृतिक को पकड़ा गया, जिनके खाते में अकेले 4 करोड़ रुपये आए थे। इसके बाद वाराणसी से अरुण कुमार तिवारी और प्रद्युम्न तिवारी को गिरफ्तार किया गया। भुवनेश्वर से महावीर शर्मा और लखनऊ से भूपेंद्र मिश्रा व आदेश यादव को दबोचा गया।

यह सिंडिकेट सीबीआई, पुलिस और कस्टम अधिकारी बनकर लोगों को कॉल करता था। ये लोग बाकायदा सीबीआई दफ्तर जैसा सेटअप बनाकर वीडियो कॉल करते थे ताकि पीड़ित को शक न हो। ये पीड़ितों को बताते थे कि उनके खिलाफ कई एफआईआर दर्ज हैं और बचने के लिए अपनी सारी संपत्ति ‘आरबीआई के मैंडेटेड अकाउंट’ में वेरिफिकेशन के लिए भेजनी होगी। जांच पूरी होने के बाद पैसा वापस करने का झूठा वादा किया जाता था।

पकड़े गए आरोपियों में कई उच्च शिक्षित हैं। मास्टरमाइंड पटेल दिव्यांग सीए (इंटर) पास है और एनजीओ चलाता है। शितोले कृतिक ने न्यूजीलैंड से आईटी में डिप्लोमा किया है। वाराणसी से पकड़ा गया प्रद्युम्न तिवारी घाटों पर पूजा-पाठ कराने वाला पुजारी है, जबकि एक अन्य आरोपी आदेश यादव ट्यूशन पढ़ाता था। आरोपी अरुण कुमार तिवारी इनकम टैक्स ऑफिस के बाहर डेटा एंट्री का काम करता था। ये सभी अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने और पैसों की लेयरिंग करने का काम करते थे। पुलिस अब इस मनी ट्रेल के जरिए कंबोडिया और नेपाल में बैठे मुख्य सरगनाओं तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

Comments are closed.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More