राष्ट्रीय जजमेंट
शाहजहांपुर में 5 साल बाद हत्या का खुलासा हुआ है यहां डीएनए रिपोर्ट के बाद में हत्या का एक सबसे सनसनीखेज खुलासा हुआ है. यहां एक दुकान में आग लगने पर जली हुई जिस लाश को पुलिस ने जानवर की लाश बताकर तालाब में फेंक दिया था. डीएनए में वो लाश इंसान की निकली. फिलहाल पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज कर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जांच शुरू कर दी है. दरअसल, पुलिस ने 19 दिसंबर 2020 को जिस जले हुए शव को जानवर का शव समझकर तालाब में फेंक दिया था. जिसकी क्छ। रिपोर्ट आने के बाद अभिषेक यादव के शव के रूप में पहचान हुई है. इस मामले में परिजन जानवर की लाश बताने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है. यह घटना शाहजहांपुर के थाना रोजा बस अड्डे की है. जहां 5 साल पहले हुई हत्या में पुलिस ने अब हत्या की रिपोर्ट दर्ज की है. जानवर का शव बताकर तालाब में फेंका था अवशेष गौरतलब है कि, 19 दिसंबर 2020 को नईम की मोबाइल शॉप में आग लगी थी. पुलिस ने नईम की दुकान से जला हुआ शव बरामद किया था. उस दौरान पुलिस ने जानवर का शव बताकर उसे तालाब में फेंक दिया था. पुलिस एक टुकड़ा फॉरेंसिक लैब भेज दिया था. इसी दौरान लापता अभिषेक यादव के पिता राम अवतार ने थाना आरसी मिशन क्षेत्र में गुमशुदगी दर्ज कराई थी. शव की पोटली में मिला थी अंडरवियर, कड़ा और ताबीज वहीं, 2022 में जब जले हुए शव की पोटली खोली गई तो उसमें अंडरवियर, हाथ का कड़ा और ताबीज को देखकर परिवार ने दावा किया कि यह शव अभिषेक यादव का है. परिजनों का कहना है कि 19 दिसंबर 2020 को उसके बेटे को किसी अज्ञात ने फोन पर अपने पास बुलाया था जिसके बाद उसका विवाद हुआ था. परिवार वालों ने की कार्रवाई की मांग परिजनों ने ही राजू और नईम पर हत्या करने का आरोप लगाया था. पुलिस ने डीएनए जांच के लिए सैंपल फॉरेंसिक लैब भेजा जिसकी रिपोर्ट मैच हो गई. फिलहाल परिजनों का कहना है कि इस पूरी घटना में उन्हें 5 साल तक इंतजार करता रहा और पुलिस कार्रवाई करने की बजाय लाश को जानवर की लाश बताती रही. अब न्याय मिला तो परिवार वाले इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. परिवारों का कहना है कि आरोपियों के साथ-साथ जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए.
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