भारतीय सेना की भैरव बटालियन की पहली झलक ही दुश्मनों को हिला देने के लिए काफी है

राष्ट्रीय जजमेंट

आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति को समझते हुए भारतीय सेना ने एक लाख से अधिक ड्रोन संचालकों का विशाल और सक्षम समूह तैयार किया है। हम आपको बता दें कि भारतीय सेना की नवीनतम स्पेशल फोर्स भैरव आधुनिक युद्ध की हर चुनौती से निपटने के लिए तैयार की जा रही है। भैरव के हर जवान को ड्रोन संचालन में दक्ष बनाया गया है। दक्षिणी कमान के अंतर्गत मरुस्थलीय क्षेत्र में गठित एक भैरव बटालियन के दौरे के दौरान देखा गया कि पैदल सेना रेजिमेंटों से चुने गए जवानों को किस तरह अत्याधुनिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ये जवान सिर्फ शारीरिक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक और तकनीकी स्तर पर भी नए युग के युद्ध के लिए ढाले जा रहे हैं।हम आपको बता दें कि सेना मुख्यालय ने वैश्विक संघर्षों और अपने अनुभवों से सबक लेते हुए भैरव बटालियनों की संरचना की है। इनका उद्देश्य तेज गति से आक्रामक अभियान चलाना और विभिन्न स्तरों पर विशेष सैन्य कार्यों को अंजाम देना है। अब तक लगभग पंद्रह भैरव बटालियन खड़ी की जा चुकी हैं, जिन्हें दोनों सीमाओं पर अलग अलग सैन्य संरचनाओं के साथ तैनात किया गया है। निकट भविष्य में इनकी संख्या बढ़ाकर पच्चीस तक ले जाने की योजना है।भैरव बटालियनें पैरा स्पेशल फोर्स और नियमित पैदल सेना के बीच की खाई को भी पाटेंगी। इन्हें सामरिक से लेकर परिचालन गहराई तक विशेष अभियानों की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। भैरव बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर का कहना है कि आधुनिक युद्ध तेजी से बदल रहा है। आज के संघर्ष दूसरे स्वरूप के हैं, जहां तकनीक, सूचना और गति निर्णायक भूमिका निभाती है। भैरव बटालियनें इसी नई सोच और नई तकनीकी जरूरतों के अनुरूप तैयार की गई हैं। उन्होंने बताया कि मरुस्थल की अपनी अलग चुनौतियां हैं। यहां विशेष कौशल, सहनशक्ति और तकनीक का सही उपयोग अनिवार्य है। इसी कारण भैरव को एक तकनीक आधारित प्रणाली के रूप में विकसित किया गया है, जो स्वतंत्र रूप से काम कर सके और भविष्य में बहु क्षेत्रीय अभियान संचालित कर सके।कमांडिंग ऑफिसर ने बताया कि मरुस्थलीय भैरव बटालियन को सन्स ऑफ द सॉयल की अवधारणा पर खड़ा किया गया है। इसमें अधिकांश जवान राजस्थान से हैं, जो इलाके, भाषा, मौसम और परिस्थितियों को गहराई से समझते हैं। यह बटालियन राजपूताना शौर्य और बलिदान की परंपरा से प्रेरित है, जो इसकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने बताया कि पिछले पांच महीनों में भैरव बटालियनों ने अत्यंत कठोर प्रशिक्षण लिया है। आधुनिक तकनीक के प्रयोग के साथ इन्होंने अभ्यास अखंड प्रहार के दौरान अपनी युद्धक क्षमता का सफल परीक्षण किया। इस अभ्यास में दक्षिणी सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ की उपस्थिति में जवानों ने अपनी तत्परता और मारक क्षमता का प्रदर्शन किया।कमांडिंग ऑफिसर ने बताया कि भैरव बल तेजी से विकसित हो रहा है और दक्षिणी कमान तथा पूरी भारतीय सेना के लिए एक तेज, सक्षम और निर्णायक शक्ति के रूप में उभर रहा है। पंद्रह जनवरी को जयपुर में होने वाली सेना दिवस परेड में भी भैरव बटालियन हिस्सा लेगी। दूसरी भैरव इकाई, जिसे डेजर्ट फाल्कन्स के नाम से जाना जाता है, इस ऐतिहासिक परेड का भाग बनेगी।हम आपको बता दें कि भारतीय सेना ने परिचालन जरूरतों को ध्यान में रखते हुए व्यापक पुनर्गठन भी किया है। इसके तहत रुद्र ब्रिगेड का गठन किया गया है, जो पैदल सेना, यंत्रीकृत इकाइयों, टैंकों, तोपखाने, विशेष बलों और मानवरहित हवाई प्रणालियों को एकीकृत करती हैं। इसके साथ ही तोपखाना, यंत्रीकृत पैदल सेना और बख्तरबंद कोर को भी ड्रोन और अन्य आधुनिक प्रणालियों से लैस किया जा रहा है, ताकि युद्धक्षेत्र में अधिक प्रभावी प्रदर्शन किया जा सके।देखा जाये तो भैरव बटालियनों के गठन के जरिये भारतीय सेना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह समय से आगे सोचने वाली शक्ति है। आज जब सीमाओं पर तनाव स्थायी वास्तविकता है और दुश्मन नई नई चालों से भारत को घेरने की कोशिश कर रहा है, तब भैरव जैसी इकाइयां एक स्पष्ट संदेश देती हैं। यह संदेश है कि भारत न केवल जवाब देने में सक्षम है, बल्कि पहल करने की ताकत भी रखता है। भैरव का हर जवान आधुनिक युद्ध का सिपाही है, जो जमीन, आकाश और सूचना के हर मोर्चे पर एक साथ लड़ सकता है।सन्स ऑफ द सॉयल की अवधारणा अपनाकर भारतीय सेना ने यह भी दिखाया है कि स्थानीय ज्ञान और राष्ट्रीय सुरक्षा का गहरा रिश्ता है। मरुस्थल को समझने वाला जवान वहां अधिक प्रभावी होगा। यह व्यावहारिक सोच भारतीय सैन्य नेतृत्व की परिपक्वता को दर्शाती है। देखा जाये तो भैरव बटालियनें भारत की सैन्य सोच में आक्रामक आत्मविश्वास का प्रतीक हैं। यही सोच भारत को सुरक्षित भी रखेगी और शक्तिशाली भी।

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