रैन बसेरों में हीटर प्रतिबंधित, सड़कों पर अलाव बैन, दिल्ली की जानलेवा ठंड में 15 दिनों में 44 बेघरों की मौत

नई दिल्ली: दिल्ली में कड़ाके की ठंड ने बेघरों और गरीबों की जान पर कहर बरपाया है। दिल्ली पुलिस के के आंकड़ों के अनुसार, 20 दिसंबर 2025 से 3 जनवरी 2026 तक के 15 दिनों में कुल 71 अज्ञात शव बरामद हुए थे। इनमें से रेलवे क्षेत्र के 18 मामले और जिन शवों पर चोट के निशान मिले या जिनमें FIR दर्ज हुई उन्हें अलग करने के बाद शुद्ध रूप से ठंड या प्राकृतिक कारणों से मानी जाने वाली मौतें मात्र 44 रह जाती हैं। शव सभी पुरुषों के हैं। सामाजिक संगठनों का मानना है कि ये मौतें मुख्य रूप से कड़ाकी की सर्दी के कारण हुई होगी, क्योंकि ये लोग सड़कों, फुटपाथों और खुले स्थानों पर सोते मिले। हालांकि पोस्टमार्टम के बाद ही मौत के कारणों पुष्टि होगी। सबसे ज्यादा मामले उत्तर जिले से सामने आए, जहां ठंड की चपेट में प्रवासी मजदूर और बेघर सबसे अधिक प्रभावित हुए।

जिलेवार और थानेवार विस्तृत जानकारी में सबसे अधिक 17 शव उत्तर जिले से बरामद हुए। इनमें कश्मीरी गेट थाने से 7 शव, सिविल लाइन्स थाने से 5 शव, सराय रोहिल्ला से 1, सदर बाजार से 1, बुराड़ी से 1, कोतवाली से 1 और मॉरिस नगर से 1 शव शामिल हैं। मध्य जिले से कुल 7 शव मिले, जिनमें जामा मस्जिद थाने से 2, पहाड़गंज से 2, दरियागंज से 1, चांदनी महल से 1 और कमला मार्केट से 1 शव बरामद हुआ। उत्तर-पश्चिम जिले में 4 शव मिले—आदर्श नगर से 1, मॉडल टाउन से 1, केशव पुरम से 1 और मुखर्जी नगर से 1। पश्चिम जिले से भी 4 शव सामने आए—मोती नगर से 1, पंजाबी बाग से 1, कीर्ति नगर से 1 और ख्याला से 1 शव। दक्षिण-पश्चिम जिले से दो शव बरामद हुए—सफदरजंग एन्क्लेव से 1 और आर.के. पुरम से 1। उत्तर-पूर्व जिले के वेलकम और न्यू उस्मानपुर थानों से 2 शव, शाहदरा जिले के गांधी नगर और जी.टी.बी. एन्क्लेव से 2 शव, दक्षिण-पूर्व जिले के कालकाजी और बदरपुर थानों से 2 शव मिले। इसके अलावा नई दिल्ली जिले के मंदिर मार्ग से 1, द्वारका सेक्टर-23 से 1, उत्तर रोहिणी से 1 और दक्षिण जिले के फतेहपुर बेरी थाने से 1 शव बरामद हुआ।

सामाजिक कार्यकर्ता का कहना है, “ये 44 मौतें दिल दहला देने वाली हैं। मूल 71 में से रेलवे और संदिग्ध मामलों को हटाने के बाद भी इतनी बड़ी संख्या बताती है कि ठंड ने कितना कहर बरपाया है। ज्यादातर शव पुरुषों के हैं, जो प्रवासी मजदूर या बेघर हैं। सरकार हर साल सर्दी में रैन बसेरे खोलती है, लेकिन संख्या और पहुंच बेहद कम है। उत्तर जिले जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में कश्मीरी गेट, सिविल लाइन्स और पहाड़गंज जैसे क्षेत्रों में बेघरों की तादाद हजारों में है, मगर वहां पर्याप्त आश्रय नहीं। ये मौतें सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि जीवित इंसानों की अनदेखी की त्रासदी हैं।

बीती दो दिसंबर को DUSIB द्वारा सभी आश्रय प्रबंधन एजेंसियों (SMA) को निर्देश दिया है कि किसी भी आश्रय गृह में हीटर का उपयोग न हो। ज्वलनशील तरल/गैस न रखी जाएं। परिसर में खाना पकाना/गर्म करना सख्त वर्जित है। दूसरी तरफ दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ठंड से बचाव के लिए RWA’s के साथ मिलकर और रैन बसेरों में जाकर लोगों को हीटर बांट रहे हैं! 26 दिसंबर को भी रैन बसेरों में हीटर वितरित किए और फेसबुक लाइव में इसका जिक्र किया है। सवाल यह है कि क्या रैन बसेरों में रहने वाले बेघरों को ठंड नहीं लगती? क्या उनका हक नहीं कि वो ठंड से बचाव करें ? इनके लिए सरकार को वैकल्पिक सुविधा करनी चाहिए। यह तो वही बात हुई कि दिल्ली में प्रदूषण है तो सांस लेना ही बंद कर दो!

एम्स गेट नंबर 2 के पास कई मरीज व तीमारदार खुले में सोते हैं, वहां पर हर बार अस्थायी रैन बसेरा लगता था, लेकिन 2024–25 के विंटर एक्शन प्लान में भी नही लग पाया और इस बार भी अब तक नही लगा है। बीते विंटर एक्शन प्लान में राष्ट्रीय जजमेंट मिडिया ग्रुप की ओर से 1 दिसंबर 2024 को ट्वीट के माध्यम से और 2 दिसंबर को 2024 को ईमेल के माध्यम से DMRC को सूचित किया था। लेकिन DMRC ने 23 दिसंबर 2024 को तृतीय पक्ष को आवंटित होने का हवाला देकर अनुमति नही दी। इस बार भी इस खबर के बाद DUSIB ने DMRC से अनुमति मांगी है। पर अभी तक अनुमति नही मिली है।

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