कानपुर में गंगा किनारे मिला डॉल्फिन का शव, पोस्टमार्टम से होगा मौत का खुलासा

राष्ट्रीय जजमेंट

कानपुर: गंगा नदी के किनारे दुर्लभ डॉल्फिन मछली मिली है. जाजमऊ पुल के नीचे शुक्रवार देर रात को क्षेत्रीय लोगों ने रेतीली जमीन पर मृत डॉल्फिन को देखा. आनन-फानन में वन विभाग व पुलिस को सूचना दी गई. तब बिना देरी के वन विभाग के अफसर व जाजमऊ थाना पुलिस टीम के कर्मी मौके पर पहुंचे.

रात का समय और गलनभरी सर्दी के बीच अफसरों ने डॉल्फिन को वहां से हटाया. लोगों का कहना था, उन्होंने इतनी बड़ी डॉल्फिन कभी नहीं देखी. ये जानकारी तो थी कि गंगा में डॉल्फिन रहती हैं. हालांकि वह तब दिखती थीं, जब गंगा का जलस्तर बहुत अधिक बढ़ा होता था. वन विभाग के अफसरों ने डॉल्फिन का पोस्टमार्टम कराने का फैसला किया है. क्षेत्रीय वन अधिकारी नावेद इकराम ने कहा कि पीएम रिपोर्ट से ही पता चलेगा कि डॉल्फिन की मौत कैसे हुई. डॉल्फिन गंगा के रेतीले भाग पर आई तो उसका शरीर फूला था.

वन विभाग के अफसर जहां ये आशंका जता रहे हैं कि डॉल्फिन की मौत की वजह गंगा के पानी में बढ़ता प्रदूषण हो सकता है. वहीं, प्रदूषण विभाग के अफसर इस बात से इंकार कर रहे हैं.
रेंजर राकेश पाण्डेय का कहना था कि मछली की पूरी जांच करेंगे. अभी शरीर देखकर लग रहा है कि मछली की मौत 2-3 दिनों पहले हुई होगी. अभी ये स्पष्ट नहीं कह सकते हैं कि मृत मछली डॉल्फिन ही है.

बता दें भारत सरकार ने साल 2009 में गंगेटिक डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया था. इनकी विशेषता यह है कि यह साफ-सुथरे पानी में रहने वाला स्तनपायी जीव है. समुद्र में मिलने वाली डॉल्फिन से गंगा में मिलने वाली से अलग होती हैं. गंगेटिक रीवर डॉल्फिन को सामाजिक प्राणी कहा जाता है, यह कभी-कभी नाव या पानी में तैरने वाले मनुष्यों के नजदीक आकर उनके साथ तैरने भी लग जाती हैं. इन्हें इंसान प्रिय हैं. ये क्षति नहीं पहुंचातीं.

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