ममता की ‘दंगे’ वाली धमकी पर BJP का पलटवार, कहा- राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़

राष्ट्रीय जजमेंट

भाजपा ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर मतदाता सूची के प्रस्तावित विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर उनकी टिप्पणी को लेकर निशाना साधा। यह घटना बनर्जी द्वारा चुनाव आयोग पर तीखा हमला करने के एक दिन बाद हुई है। बनर्जी ने आरोप लगाया था कि आयोग के अधिकारी विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा से पहले ही उनकी सरकार के अधिकारियों को धमका रहे थे और राजनीतिक प्रभाव में काम कर रहे थे।ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि भाजपा मतदाता सूची के एसआईआर के नाम पर आग से खेल रही है और चेतावनी दी कि मतदाता सूची से छेड़छाड़ का कोई भी प्रयास लोकतंत्र के साथ विश्वासघात के समान होगा। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की एसआईआर पर जिस तरह टिप्पणी की है, वह चौंकाने वाला और चिंता का विषय है।संबित पात्रा ने कहा कि ममता बनर्जी ने कहा कि अगर SIR किया गया, तो बंगाल में दंगे भड़क जाएँगे और उसके भयानक परिणाम होंगे। दंगे आप ही करवाएँगी, क्योंकि वहाँ आपकी सरकार है और आपकी पुलिस है। ममता बनर्जी, आप धमकियाँ दे रही हैं। ममता बनर्जी के लिए, अगर उन्हें बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं के लिए बंगाल में दंगे और खून-खराबा भी करना पड़े, तो भी वे पीछे नहीं हटेंगी। यही चेतावनी उन्होंने कल बंगाल में दी थी।।भाजपा के राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग द्वारा स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वस्थ प्रक्रिया से होने वाले चुनावों के लिए निर्धारित एसआईआर की प्रक्रिया के विरुद्ध जिस प्रकार का खतरनाक बयान दिया है, वह प्रकारांतर से सीधे हिंसा भड़काने का संकेत देता है। उन्होंने कहा कि यह अपने आप में तृणमूल कांग्रेस की नैतिकता और पश्चिम बंगाल सरकार की संवैधानिकता दोनों पर प्रश्नचिह्न लगाता है। यह कैसे संभव है कि कानून-व्यवस्था, जो राज्य का विषय है, उस राज्य की मुख्यमंत्री स्वयं इस प्रकार से चुनावी प्रक्रिया को थ्रेटन करें?भाजपा नेता ने ममता से पूछा कि क्या आप वही ममता बनर्जी नहीं हैं, जिन्होंने घुसपैठियों के मुद्दे पर लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष फाइल फेंक दी थी, केवल इसलिए कि उस पर चर्चा नहीं होने दी जा रही थी? आज जब निष्पक्ष और पारदर्शी चुनावी प्रक्रिया के तहत अवांछित वोटरों की पहचान की जा रही है, तो वही ममता जी उसके खिलाफ खड़ी हैं यह दर्शाता है कि राजनीति में लोग किस प्रकार अपने मूल विचारों से पलट जाते हैं, और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर विषय पर भी समझौते की राजनीति करते हैं जो देश के लिए अत्यंत घातक है।उन्होंने कहा कि पूर्व में भी पश्चिम बंगाल की सरकार ने जिस प्रकार से हिंसा को संरक्षण दिया, उस पर न्यायालयों की कठोर टिप्पणियाँ रही हैं। ऐसे में यदि मुख्यमंत्री स्वयं सर्वोच्च पद से इस प्रकार के बयान दें, तो यह अत्यंत गंभीर और चिंताजनक है संविधान अगर खतरे में है, तो वह इस प्रकार की सोच की वजह से है। और एक पंक्ति में कहूं अगर तृणमूल कांग्रेस सरकार की ऐसी सोच है, तो पश्चिम बंगाल की स्थिति यह है “आगे घोर अंधेरा है, जब पहरेदार लुटेरा है।”

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