राष्ट्रपति मुर्मू ने दोनों सदनों को संबोधित किया, अपने अभिभाषण में कहा- कश्मीर में मतदान के कई रिकॉर्ड टूटे, घाटी ने देश के दुश्मनों को करारा जवाब दिया

राष्ट्रीय जजमेंट न्यूज

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का बृहस्पतिवार को संसद भवन में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्वागत किया। इस अवसर पर एक अधिकारी हाथ में ‘राजदंड’ (सेंगोल) लिए हुए था। राष्ट्रपति 18वीं लोकसभा के गठन और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में नयी सरकार बनने के बाद संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करने जा रही हैं। राष्ट्रपति को संसद भवन के प्रांगण में सलामी गारद दिया गया और धनखड़, मोदी, बिरला तथा संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू उन्हें लोकसभा कक्ष तक ले गए।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने अभिभाषण में 18वीं लोकसभा के नवनिर्वाचित सदस्यों को बधाई दी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने लोकसभा चुनाव के सफल आयोजन के लिए निर्वाचन आयोग को बधाई दी। राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने अभिभाषण में कहा कश्मीर में मतदान के कई रिकॉर्ड टूटे, घाटी ने देश के दुश्मनों को करारा जवाब दिया। राष्ट्रपति मुर्मू आगे कहा कि केंद्रीय बजट भविष्योन्मुखी दस्तावेज होगा, सुधारों को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के दोनों सदनों के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए कहा, “देश में छह दशक के बाद पूर्ण बहुमत वाली स्थिर सरकार बनी है। लोगों ने तीसरी बार इस सरकार पर भरोसा जताया है। लोग जानते हैं कि केवल यही सरकार उनकी आकांक्षाओं को पूरा कर सकती है…18वीं लोकसभा कई मायनों में ऐतिहासिक लोकसभा है। इस लोकसभा का गठन अमृत काल के शुरुआती वर्षों में हुआ था। यह लोकसभा देश के संविधान को अपनाने के 56वें ​​वर्ष की भी गवाह बनेगी…आगामी सत्रों में यह सरकार अपने कार्यकाल का पहला बजट पेश करने जा रही है। यह बजट सरकार की दूरगामी नीतियों और भविष्य की दूरदर्शिता का प्रभावी दस्तावेज होगा। बड़े आर्थिक और सामाजिक फैसलों के साथ-साथ इस बजट में कई ऐतिहासिक कदम भी देखने को मिलेंगे…”राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के दोनों सदनों के संयुक्त सत्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा, “करोड़ों देशवासियों की ओर से मैं भारत के चुनाव आयोग का आभार व्यक्त करना चाहती हूँ। यह दुनिया का सबसे बड़ा चुनाव था…जम्मू-कश्मीर में मतदान के दशकों पुराने रिकॉर्ड टूट गए हैं। पिछले 4 दशकों से कश्मीर में बंद और हड़ताल के बीच कम मतदान हुआ है। भारत के दुश्मनों ने इसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर की राय के रूप में प्रचारित किया। लेकिन इस बार कश्मीर घाटी ने ऐसी सभी ताकतों को करारा जवाब दिया है…”

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